Gaya Ji News(गुरारू से सुमित कुमार की रिपोर्ट ):
गुरारू बाजार को नगर पंचायत का दर्जा देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से यह मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है.
जबकि पंचायत की आबादी 22 हजार से अधिक हो चुकी है और गुरारू बाजार भी इसी पंचायत के अंतर्गत आता है. तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के बावजूद यहां सुविधाओं का विकास अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाया है. गुरारू एक औद्योगिक क्षेत्र है, जहां दर्जनों कंपनियों के फैक्ट्री लगे हुए हैं.
गुरारू बाजार की सबसे बड़ी समस्या
इस दौरान स्थानीय लोगों ने कहा कि गुरारू बाजार की सबसे बड़ी समस्या नाले के पानी की समुचित निकासी नहीं होना है. बाजार में नालों का निर्माण तो कराया गया है, लेकिन जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से बरसात और सामान्य दिनों में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.
कई नाले जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं, जिससे गंदगी और जलजमाव की समस्या बनी रहती है. पंचायत स्तर पर नालों की नियमित सफाई और डीडीटी छिड़काव के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं है. इसके कारण बाजार क्षेत्र में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं रह पाती.
नगर पंचायत की मांग
लोगों का मानना है कि यदि गुरारू पंचायत को नगर पंचायत का दर्जा मिल जाता है तो सफाई, जल निकासी, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए अलग से संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे क्षेत्र का समुचित विकास संभव हो सकेगा. स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि पिछले दिनों इससे छोटे क्षेत्र इमामगंज को नगर पंचायत का दर्जा मिल चुका है. ऐसे में गुरारू की उपेक्षा समझ से परे है.
समाजसेवी की मांग
समाजसेवी मोहम्मद सुद्दु ने कहा कि जनसंख्या और क्षेत्रीय विकास को देखते हुए गुरारू नगर पंचायत बनने की सभी पात्रताएं पूरी करता है. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी यदि गंभीरता से पहल करें तो गुरारू को भी जल्द नगर पंचायत का दर्जा मिल सकता है. उन्होंने सरकार से इस दिशा में सकारात्मक कार्रवाई की मांग की है.
आंदोलन की चेतावनी
जदयू नेता सुनील पासवान ने कहा कि यदि गुरारू को नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिला तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि गुरारू क्षेत्र की बढ़ती आबादी, शहरी सुविधाओं की आवश्यकता और विकास की मांग को देखते हुए नगर पंचायत का दर्जा दिया जाना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द इस दिशा में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो स्थानीय जनता के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.
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