Gaya Ji Municipal Corporation : गया नगर निगम में करीब 600 रुपये कीमत वाले सेनेटरी पैड बॉक्स को 4000 रुपये में खरीदने का मामला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. नगर आयुक्त डॉ. गगन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गहन जांच के आदेश दिये हैं. प्रारंभिक कार्रवाई के तहत सहायक स्वच्छता पदाधिकारी शुभम कुमार से जुड़ी सभी खरीद फाइलों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी है.
खरीद फाइलों की जांच के बाद होगी कार्रवाई
नगर निगम प्रशासन मामले से जुड़े दस्तावेजों और खरीद प्रक्रिया की जांच कर रहा है. नगर आयुक्त डॉ. गगन ने स्पष्ट किया है कि निगम में मनमानी और नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जायेगी. जांच पूरी होने के बाद अनियमित कार्यों की सूची तैयार कर संबंधित विभागीय अधिकारी को पत्र भेजा जायेगा, ताकि दोषी पाए जाने पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
50 वाहनों में लगाये गये थे सेनेटरी पैड बॉक्स
बताया जा रहा है कि सेनेटरी पैड बॉक्स निगम के करीब 50 वाहनों में लगाये गये थे. आरोप है कि इनकी खरीद बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर की गयी. मामले में बाजार मूल्य और खरीद दर के बीच बड़े अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इसी को देखते हुए निगम प्रशासन ने खरीद से संबंधित रिकॉर्ड की जांच शुरू की है.
सहायक स्वच्छता पदाधिकारी पहले से विवादों में
सेनेटरी पैड बॉक्स खरीद मामले के अलावा सहायक स्वच्छता पदाधिकारी शुभम कुमार पर पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं. हाल ही में निगम बोर्ड और स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों ने उनके खिलाफ सवाल उठाये थे. उन पर स्वच्छता सर्वेक्षण में पेंटिंग, ओआरएस खरीद और पोस्टर-बैनर के नाम पर नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये के भुगतान का आरोप लगाया गया था.
मजदूरों को कम मजदूरी देने की शिकायत भी उठी
सहायक स्वच्छता पदाधिकारी से जुड़े मामलों में मजदूरों को निर्धारित मजदूरी से कम भुगतान किये जाने की शिकायत भी सामने आने की बात कही गयी है. शिकायत मिलने के बावजूद इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं किये जाने का भी आरोप लगाया गया था. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.
नगर निगम के अधिकारियों से वापस ली गयीं सरकारी गाड़ियां
इधर, गया नगर निगम प्रशासन ने सरकारी वाहनों के कथित दुरुपयोग और अनावश्यक खर्च पर रोक लगाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है. नगर आयुक्त डॉ. गगन के निर्देश पर कई जूनियर और तकनीकी अधिकारियों को मिली सरकारी वाहन की सुविधा तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गयी है.
अब सिर्फ चुनिंदा अधिकारियों को मिलेगी सरकारी गाड़ी
नगर निगम प्रशासन के फैसले के बाद अब सरकारी वाहन की सुविधा केवल सक्षम अधिकारियों को दी जायेगी. इनमें नगर आयुक्त, दोनों उपनगर आयुक्त और जल पर्षद के कार्यपालक अभियंता शामिल हैं. इससे पहले सहायक स्वच्छता पदाधिकारी, सिटी मैनेजर, सहायक अभियंता, वास्तुविद और टाउन प्लानिंग सुपरवाइजर समेत कई अधिकारियों को निगम की ओर से वाहन उपलब्ध कराया गया था.
डीजल की खपत को लेकर भी उठे सवाल
निगम के नियमों के अनुसार सरकारी वाहनों के लिए प्रतिदिन पांच लीटर डीजल देने का प्रावधान था. लेकिन वाहन शाखा की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ स्वच्छता अधिकारियों द्वारा प्रतिदिन 10 से 20 लीटर तक डीजल लिये जाने की बात सामने आयी है. निगम के आंकड़ों के अनुसार एक गाड़ी और ड्राइवर के एवज में हर महीने 27,900 रुपये का भुगतान किया जा रहा था. इसके अलावा डीजल का खर्च भी निगम को वहन करना पड़ता था.
उपनगर आयुक्त को मिली विधि, वाहन और स्वच्छता शाखा की जिम्मेदारी
नगर निगम की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए मंगलवार को आधिकारिक पत्र जारी किया गया. इसके तहत उपनगर आयुक्त मोहम्मद नेशात आलम को विधि, वाहन और स्वच्छता शाखा का पूर्ण प्रभार सौंपा गया है. निगम प्रशासन का उद्देश्य विभागीय कामकाज को व्यवस्थित करने और अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण करना बताया गया है.
