Gaya College News : गया कॉलेज परिसर में स्थित गर्ल्स हॉस्टल की छात्राएं रविवार को हॉस्टल के मुख्य गेट के सामने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गईं. इस दौरान छात्राओं ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया. छात्राओं ने बिना किसी पूर्व नोटिस के मेस बंद करने और हॉस्टल में व्याप्त घोर कुव्यवस्था का आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द निदान की मांग की.
भूख हड़ताल कर जताया विरोध
हॉस्टल गेट पर छात्राओं ने भूख हड़ताल कर अपना कड़ा विरोध जताया और हॉस्टल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. छात्राओं का सीधा आरोप है कि बिना किसी सूचना के अचानक मेस बंद कर दिया गया, जिससे उन्हें भूखे पेट रहने पर मजबूर होना पड़ रहा है.
दूषित पानी और वॉशरुम की बदहाली का आरोप
धरना का नेतृत्व कर रही छात्रा ट्विंकल रक्षिता ने हॉस्टल प्रबंधन पर तानाशाही और बदइंतजामी के गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने बताया कि हॉस्टल में पानी की टंकी का ढक्कन तक गायब है और उसकी सफाई कई दिनों से नहीं हुई है. टंकी में अक्सर पक्षी मरकर गिर जाते हैं और छात्राओं को मजबूरी में वही दूषित पानी इस्तेमाल करना पड़ता है. नल से पानी के साथ गंदगी भी आती है. इसके अलावा हॉस्टल में आठ बाथरूम हैं, लेकिन पिछले साल से उनका काम पेंडिंग पड़ा है.
Gaya Ji News : सिर्फ दो वॉशरुम चालू
वर्तमान में सिर्फ दो वॉशरुम चालू हैं, जिसे 15 से 20 लड़कियां इस्तेमाल करने को विवश हैं. परिसर में चारों तरफ गंदगी रहती है. काफी विरोध के बाद केवल बड़ी झाड़ियों को हटाया गया है. हालांकि, काफी मान-मनौव्वल और केयरटेकर से मिले ठोस आश्वासन के बाद छात्राओं ने भूख हड़ताल खत्म की, लेकिन चेतावनी दी कि समस्या दूर नहीं होने पर वे फिर से हड़ताल पर बैठेंगी.
बिना नोटिस मेस बंद, ₹600 शुल्क बढ़ाने का दबाव
छात्रा ट्विंकल रक्षिता ने बताया कि नियम के मुताबिक जब तक कॉलेज खुला रहेगा, तब तक मेस अनिवार्य रूप से चलना चाहिए. लेकिन 22 जून से हॉस्टल खुलने के बाद भी मेस को बंद रखा गया है. जब छात्राओं ने इस पर सवाल किया, तो केयरटेकर का जवाब था कि महंगाई बढ़ गई है.
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प्रबंधन द्वारा सीधे 600 रुपये फीस बढ़ाने की बात कही जा रही है. ट्विंकल ने सवाल उठाया कि बिना किसी आधिकारिक नोटिस के इतना बड़ा फैसला कैसे लिया जा सकता है. कल को कोई नया केयरटेकर आएगा और फिर से फीस बढ़ा देगा, तो क्या छात्राएं चुपचाप फीस देती रहेंगी.
छात्राओं की मांग: हॉस्टल के लिए बने परमानेंट महिला कमेटी
हॉस्टल में रह रही छात्राओं ने बताया कि यहां करीब 100 छात्राएं रहती हैं, जिन्हें आए दिन कई तरह की संवेदनशील समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इसलिए हॉस्टल के सुचारू संचालन और निगरानी के लिए महिलाओं की एक परमानेंट कमेटी का गठन होना चाहिए, जिसमें कॉलेज की महिला प्रोफेसर शामिल हों. ऐसा होने से छात्राओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए हर दिन पुरुष कर्मचारियों या अधिकारियों से लड़ना नहीं पड़ेगा.
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केयरटेकर की सफाई
दूसरी तरफ, हॉस्टल के केयरटेकर मनीष प्रताप सिंह ने छात्राओं द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि हॉस्टल में सफाई और वॉशरूम की व्यवस्थाएं हमेशा नियमित रूप से की जाती हैं. पूर्व में मेस में कार्यरत महिला रसोइया का खाना छात्राओं को पसंद नहीं आ रहा था, जिसके बाद पुरुष कुक रखा गया था.
कुक के अचानक काम छोड़ने से हुई समस्या
लेकिन छात्राओं ने जब उस पर भी आरोप लगाए, तो कुक ने खुद काम छोड़ दिया. फीस वृद्धि और मेस बंद होने के सवाल पर केयरटेकर ने तर्क दिया कि मात्र 1800 रुपये में आज के समय में बढ़िया और सामान्य खाना देना मुमकिन नहीं है. उन्होंने माना कि जब 23 जून को कॉलेज खुला, तो गैस की किल्लत और कुक के अचानक काम छोड़ देने की वजह से 4-5 दिन खाना बनने में थोड़ी समस्या जरूर हुई थी.
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