गया जी में डेंगू से बचाव के लिए जिले में अब तक वैक्सीन देना शुरू नहीं किया गया है, इसके बावजूद इस बीमारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जोर-शोर से तैयारियां की गई हैं. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, बिहार में फिलहाल सिर्फ पीएमसीएच (PMCH) में ही वैक्सीन देना शुरू किया गया है.
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही मगध मेडिकल अस्पताल में भी वैक्सीन देने की शुरुआत की जाएगी. चार वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को तीन माह के अंतराल पर दो डोज दिए जाने हैं. 'क्यूडेंगा' (Qdenga) नामक यह वैक्सीन डेंगू के खिलाफ बेहद कारगर साबित हो रही है.
सभी बेड पर मच्छरदानी और डॉक्टरों का ड्यूटी चार्ट तैयार
जुलाई से सितंबर माह के दौरान डेंगू के खतरे को देखते हुए मगध मेडिकल अस्पताल के स्पेशल वार्ड में मरीजों के लिए 100 बेड आरक्षित कर दिए गए हैं. यहां सभी बेड पर मच्छरदानी लगाने के साथ-साथ आवश्यक दवाइयों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का ड्यूटी चार्ट भी तैयार कर लिया गया है.
पिछले कई वर्षों से नगर निकाय और स्वास्थ्य विभाग की बेहतर तैयारी के चलते डेंगू पीड़ितों को स्थानीय स्तर पर ही मुकम्मल इलाज की सुविधा मिल जा रही है.
प्लेटलेट्स उपलब्ध, दूसरे शहरों में रेफर करने की जरूरत नहीं
डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू होने पर मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स का स्तर तेजी से कम होने लगता है. मगध मेडिकल अस्पताल में प्लेटलेट्स की पर्याप्त उपलब्धता होने के कारण अत्यंत विषम परिस्थितियों में ही मरीजों को रेफर करने की नौबत आती है. पिछले दो वर्षों के आंकड़े देखें तो केवल परिजनों की निजी मांग पर ही मरीजों को अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है.
इस तरह फैलती है बीमारी और ये हैं मुख्य लक्षण
डेंगू मुख्य रूप से संक्रमित मादा 'एडीज एजिप्टी' मच्छर के काटने से मनुष्यों में फैलता है:
- लक्षण: तेज बुखार, आंखों के पीछे के हिस्से व पूरे शरीर में तेज दर्द, तथा जोड़ों में असहनीय दर्द इसके मुख्य लक्षण हैं.
- संक्रमण का चक्र: जब कोई मच्छर डेंगू से पीड़ित व्यक्ति को काटता है, तो वायरस मच्छर के शरीर में प्रवेश कर जाता है. इसके बाद जब वही मच्छर किसी अन्य स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उस व्यक्ति के शरीर में चला जाता है. इस प्रकार यह बीमारी मच्छरों के माध्यम से एक से दूसरे व्यक्ति में फैलती है.
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एम. ई. हक ने बताया कि सभी अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बेड, टेस्ट किट, मच्छरदानी, दवाइयां और प्लेटलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है. शहरी क्षेत्रों में नगर निगम द्वारा फॉगिंग व एंटी-लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है, जबकि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य विभाग यह जिम्मेदारी संभाल रहा है.
सतर्कता और साफ-सफाई ही सबसे बड़ा बचाव: डॉ. प्रवीण अग्रवाल
मगध मेडिकल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल ने बताया कि डेंगू के प्रकोप को रोकने के लिए साफ-सफाई और सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण है.
- बचाव के उपाय: खुले टैंक, ड्रम, पुराने टायर, गमले, कूलर और खुले बर्तनों में जमा पानी में डेंगू के मच्छर पनपते हैं, इसलिए इनकी नियमित सफाई बेहद जरूरी है.
- सावधानी: दिन के समय भी मच्छरदानी का प्रयोग करें और शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें.
उन्होंने सलाह दी कि थोड़ा सा भी लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत अस्पताल लाएं. अस्पताल में मरीजों के समुचित इलाज के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर तुरंत प्लेटलेट्स उपलब्ध कराने की पूरी व्यवस्था की गई है.
