बिहार के इस रूट पर 180 की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन, अब मिनटों में तय होगा घंटों का सफर

Indian Railways: डीडीयू-गया-धनबाद रेल लाइन पर रेलवे ने 180 किमी प्रति घंटे की स्पीड से सफल ट्रायल कर लिया है. अगले महीने से इस रूट पर ट्रेनें तेज चलेंगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और सफर ज्यादा सुविधाजनक होगा.

Indian Railways: डीडीयू, गया और धनबाद के बीच चलने वाले ग्रैंड कॉर्ड रूट पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने की तैयारी पूरी हो चुकी है. रेलवे ने इस रूट पर 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफल ट्रायल रन भी पूरा कर लिया है. अब उम्मीद है कि अगले महीने से ट्रेनों की अधिकतम स्पीड बढ़ा दी जाएगी.

इंफ्रास्ट्रक्चर में किए गए बड़े बदलाव

ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए सिर्फ इंजन ही नहीं, पूरे ट्रैक सिस्टम को मजबूत बनाया गया है. रेलवे ने इस रूट पर नई और मजबूत पटरियां बिछाई हैं. साथ ही बेहतर स्लीपर और गिट्टी का इस्तेमाल किया गया है ताकि तेज गति में भी ट्रैक स्थिर बना रहे. कई घुमावदार जगहों को भी सीधा किया गया है, ताकि ट्रेन बिना झटके के तेज रफ्तार से गुजर सके. इससे यात्रियों को आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा.

ट्रेन चलने को तैयार

रेलवे ने इस रूट पर दिसंबर 2025 से अब तक चार बार 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रायल किया है. हर बार ट्रैक, सिग्नल और ओवरहेड वायर की बारीकी से जांच की गई. जहां भी छोटी-मोटी कमी मिली, उसे तुरंत ठीक किया गया. अब यह रूट पूरी तरह हाई स्पीड ट्रेन संचालन के लिए तैयार माना जा रहा है.

बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें

यात्रियों को मिलेगा बड़ा फायदा

इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा यात्रियों को होगा. डीडीयू से गया और धनबाद के बीच सफर में अब पहले से कम समय लगेगा. रोज यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह सुविधा काफी फायदेमंद होगी. ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने से न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि व्यापार और उद्योग को भी फायदा होगा. तेज और बेहतर कनेक्टिविटी से इस इलाके में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

इसे भी पढ़ें: जदयू ने 20 अप्रैल को बुलाई विधायक दल की बैठक, इस नेता को मिल सकता है मौका

बिहार में जमीन मापी का नया नियम लागू, सात दिन में मापी और 14 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >