Dobhi Amritsar Kolkata Industrial Corridor: बिहार उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने रविवार को डोभी में अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर क्षेत्र का निरीक्षण किया. उन्होंने मौके पर चल रहे काम, जमीन और आने-जाने की सुविधाओं की जानकारी ली.
निरीक्षण के बाद अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई. इसमें शेरघाटी एसडीओ जतिन कुमार, बियाडा के अधिकारी, सीओ भारतेंदु और दूसरे संबंधित अधिकारी मौजूद रहे.
1670 एकड़ जमीन पहले ही हो चुकी है अधिग्रहित
अधिकारियों ने नक्शे के जरिए सचिव को पूरे प्रोजेक्ट की जानकारी दी. बताया गया कि इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए 1670 एकड़ जमीन पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है.
इसके अलावा वन विभाग की करीब 1300 एकड़ जमीन भी प्रोजेक्ट के लिए उपलब्ध करा दी गई है. इसके बदले वन विभाग को दूसरी जगह जमीन दी जा चुकी है.
गेस्ट हाउस और हेलीपैड का भी लिया जायजा
सचिव कुंदन कुमार ने कॉरिडोर क्षेत्र में बन रहे गेस्ट हाउस का निरीक्षण किया. इसके साथ प्रस्तावित हेलीपैड और इलाके के दूसरे हिस्सों को भी देखा.
उन्होंने यह भी जानकारी ली कि कॉरिडोर से वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे कितनी दूरी पर है और झारखंड की सीमा कितनी नजदीक है.
NH-19 तक पहुंचने वाली सड़क भी देखी
निरीक्षण के दौरान कॉरिडोर तक आने वाली सड़कों की स्थिति भी देखी गई. सूरज मंडल के पास से NH-19 को जोड़ने वाली निर्माणाधीन मुख्य सड़क का भी सचिव ने जायजा लिया.
इस सड़क को कॉरिडोर की कनेक्टिविटी के लिहाज से देखा गया और निर्माण की स्थिति की जानकारी ली गई.
आसपास की और जमीन पर मांगी रिपोर्ट
बैठक में सचिव ने कॉरिडोर के आसपास मौजूद जमीन का आकलन करने का निर्देश दिया. साथ ही आगे जरूरत पड़ने पर और जमीन लेने की संभावना पर भी रिपोर्ट तैयार करने को कहा. शेरघाटी एसडीओ को यह रिपोर्ट दो दिनों के अंदर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
ग्रीनफील्ड क्षेत्र को जोड़ने की संभावना भी तलाशने का निर्देश
सचिव ने वन क्षेत्र में विकसित किए जा सकने वाले ग्रीनफील्ड क्षेत्रों को भी कॉरिडोर में शामिल करने की संभावना देखने को कहा. इससे जुड़े विकल्पों की भी जानकारी जुटाने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया है.
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प्रोजेक्ट से जुड़ी कंपनी के अधिकारी भी रहे मौजूद
निरीक्षण और बैठक के दौरान कॉरिडोर का आधारभूत ढांचा तैयार कर रही एन.के. कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे.
फिलहाल सरकार की नजर कॉरिडोर के आसपास उपलब्ध जमीन, सड़क कनेक्टिविटी और भविष्य में इसके विस्तार की संभावनाओं पर है.
