किडनैपिंग के 4 साल बाद बेटा से मिलते ही रोने लगी मां, आद्विक अपहरण केस में सामने आई दूसरी हैरान करने वाली कहानी

Bihar News: गया पुलिस ने 4 साल पहले मंदिर से चोरी हुए मासूम शिवम को उसकी मां से मिला दिया. आद्विक किडनैपिंग केस की जांच के दौरान यह बड़ा खुलासा हुआ, जिसके बाद मां-बेटे का भावुक मिलन देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं. मामले की पूरी कहानी जानिए...

Bihar News: गया पुलिस ने एक ऐसी कहानी का खुलासा किया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया. चार साल पहले मंदिर से चोरी हुआ आठ साल का बच्चा शिवम आखिरकार अपनी मां से मिल लिया. जैसे ही मां की नजर बेटे पर पड़ी, वह दौड़कर उसे सीने से लगा ली. दोनों की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे. मां बार-बार बस यही कह रही थी- कहां चले गए थे बाबू… अब छोड़कर मत जाना. यह पूरा मामला उस वक्त सामने आया जब पुलिस 16 मई को किडनैप हुए मासूम आद्विक की तलाश कर रही थी.

आद्विक की तलाश में खुला 4 साल पुराना राज

औरंगाबाद के ओबरा देवी मंदिर से 16 मई को आद्विक का अपहरण हुआ था. पुलिस ने 19 मई को गया से उसे सुरक्षित बरामद कर लिया. लेकिन जिस महिला के घर से आद्विक मिला, वहीं एक और बच्चा भी मौजूद था. यही बच्चा शिवम निकला, जो चार साल पहले उसी मंदिर से चोरी हुआ था.

पुलिस को शुरुआत में ही महिला की बातों पर शक हुआ. महिला उस बच्चे को अपना बेटा बता रही थी, लेकिन जांच में कई बातें मेल नहीं खा रही थीं. इसके बाद पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए.

वट सावित्री पूजा के दिन हुआ था अपहरण

जांच में पता चला कि साल 2022 में वट सावित्री पूजा के दिन शिवम का अपहरण हुआ था. उस समय वह अपनी मां के साथ ओबरा देवी मंदिर गया था. पूजा के दौरान भीड़ का फायदा उठाकर आरोपी महिला रंजू देवी उसे बहलाकर अपने साथ ले गई थी. हैरानी की बात यह है कि आद्विक को भी ठीक उसी तरीके से उसी मंदिर से उठाया गया था.

बेटे के गुम होने के बाद टूट गई थी मां

शिवम के गायब होने के बाद परिवार ने उसे काफी खोजा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. बेटे के बिछड़ने का सदमा मां शांति पांडेय बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं. बाद में वह अपने पिता के साथ दिल्ली चली गईं. उन्होंने बताया कि चार साल तक हर जगह बेटे को खोजा, लेकिन कुछ पता नहीं चला. उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी.

आरोपी महिला ने बदल दिया था बच्चे का नाम

पुलिस के अनुसार, चार साल तक साथ रहने की वजह से शिवम अपने असली परिवार को लगभग भूल चुका था. आरोपी महिला रंजू देवी ने उसका नाम बदलकर ‘रौशन’ रख दिया था. उसने बच्चे का एडमिशन डीएवी स्कूल में भी कराया था और उसे अपने बेटे की तरह रखती थी. पुलिस ने पुराने फोटो और परिवार की तस्वीरें दिखाकर धीरे-धीरे बच्चे को उसकी असली पहचान याद दिलाई. इसके बाद पूरा सच सामने आ गया.

बच्चा चुराने के पीछे की वजह जानिए

पूछताछ में आरोपी रंजू देवी ने बताया कि शादी के कई साल बाद भी उसे संतान नहीं हुई. इसी वजह से उसके पति ने दूसरी शादी कर ली. इसके बाद वह अकेले रहने लगी. उसने पहले बच्चा गोद लेने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुई. फिर उसने मंदिरों और भीड़भाड़ वाली जगहों से बच्चों को चुराने की योजना बनाई.

आद्विक को लड़की समझकर उठाया

महिला ने पुलिस को बताया कि आद्विक के लंबे बाल थे. उसे लगा कि वह लड़की है. उसने सोचा कि एक बेटा और एक बेटी होने से उसका परिवार पूरा हो जाएगा. लेकिन आद्विक किडनैपिंग केस की जांच में ही चार साल पुराना शिवम अपहरण कांड भी खुल गया.

पुलिस भी रह गई हैरान

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच सही दिशा में नहीं बढ़ती, तो शायद शिवम कभी अपने असली परिवार तक नहीं पहुंच पाता. वहीं, जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि आरोपी महिला मानसिक रूप से असामान्य भी हो सकती है.

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Published by: Abhinandan Pandey

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