अपनो संग होली मनाने पहुंच रहे परदेसियों से लौटी वीरान घरों की रौनक

मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, कोलकाता, अमृतसर, अहमदाबाद, पुणे सरीखे क्षेत्रों से आने वाली तमाम ट्रेनों की कमोबेश एक सी स्थिति है.

By Prabhat Khabar News Desk | March 7, 2025 10:37 PM

दरभंगा. रंगों का त्योहार होली को लेकर उमंग परवान चढ़ने लगा है. रोजी-रोटी या पढ़ाई के लिए अपनी मिट्टी से दूर रह रहे लोग अपनों संग त्योहार मनाने के लिए घर लौटने लगे हैं. लिहाजा वीरान पड़े घर-आंगन गुलजार हो उठे हैं. अपनों के इंतजार में मायूस चेहरों की खुशियां, बूढ़ी झुर्रियों के बीच चमक बिखेरने लगी हैं. परदेसियों की भी खुशी छलकती दिख रही है. हालांकि इस खुशी के पल को हासिल करने के लिए परदेसियों को घंटों नारकीय यातना झेलनी पड़ रही है. आवक गाड़ियों में टिकट उपलब्ध नहीं रहने के कारण बर्थ तो दूर, खड़े होने तक की जगह नहीं मिल पाती. उल्लेखनीय है कि इन दिनों लंबी दूरी के तमाम ट्रेनों से ठूंस-ठूंस कर यात्री पहुंच रहे हैं. ट्रेन पहुंचते ही पूरा दरभंगा जंक्शन यात्रियों से पट जाता है. दो दिन की कोशिश के बाद ट्रेन में हो सके सवार दिल्ली से शुक्रवार को दरभंगा पहुंचे मुरैठा के संतोष कुमार ने बताया कि दो दिनों के प्रयास के बाद आज यहां पहुंच सके हैं. बुधवार को ही नई दिल्ली स्टेशन पर पहुंच गए थे. पहले बिहार संपर्क क्रांति में सवार होने की कोशिश की. पत्नी एवं बच्चों के साथ रहने की वजह से कामयाब नहीं हो सके. वैशाली एवं स्वतंत्रता सेनानी सुपर फास्ट भी पलक झपकते ही ठसाठस भर गई. वो तो मधुबनी के नौजवान ने मदद की, तो गुरुवार को बिहार संपर्क क्रांति में चढ़ पाए. सामान रखने वाली जगह पर किसी तरह पत्नी व बच्चों को बैठा दिया. खुद पूरा सफर खड़ा होकर आया हूं. आरक्षण लेने के बाद भी फजीहत मनीगाछी के रामाकांत सदा ने बताया कि पहले से ही रिजर्वेशन करा रखा था. दिल्ली में आरपीएफ वालों ने सवार करा दिया, लेकिन उसके बाद इस तरह पूरा कोच यात्रियों से पट गया कि शौचालय तक जाना भी संभव नहीं हो पा रहा था. वेटिंग टिकट लेकर या टीटी से फाइन भरकर टिकट लेने वाले सवार हो गए. ऐसी विकट स्थिति में पहली बार यात्रा की है. पहले से अंदाजा रहता तो नहीं आते. फर्श पर पांव रखने तक की जगह नहीं दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, कोलकाता, अमृतसर, अहमदाबाद, पुणे सरीखे क्षेत्रों से आने वाली तमाम ट्रेनों की कमोबेश एक सी स्थिति है. चार यात्रियों के लिए बने बर्थ पर आठ से दस लोग बैठे रहते हैं. बोगियों के फर्श इस कदर पटे रहते हैं कि पांव रखने तक की जगह नहीं रहती. गेट पर यात्री लटके रहते हैं. वृद्ध, बच्चे, महिला व शारीरिक रूप से लाचार परिजन के साथ आने वालों की समस्या का सहज अनुमान लगाया जा सकता है. स्पेशल ट्रेन से भी राहत नहीं ऐसा नहीं है कि पहली बार होली पर अचानक इतनी भीड़ उमड़ पड़ी है. प्रति वर्ष ऐसी ही स्थिति रहती है. आवक ट्रेनों में इस अवधि में मारामारी मची रहती है, बावजूद रेलवे की ओर से स्थायी समाधान की दिशा में धरातल पर ठोस पहल नहीं की जा रही है. हालांकि परंपरागत रूप में इस बार भी होली स्पेशल ट्रेन दी गई हैं, लेकिन यात्रियों की डिमांड के सामने ये नाकाफी ही है. बता दें कि दिल्ली से दरभंगा, आनंद विहार से जयनगर, हावड़ा से रक्सौल, कोलकाता से जयनगर के लिए फेस्टिवल स्पेशल की घोषणा रेलवे की ओर से की गई है. फिर भी परेशानी बरकरार है. इसी समस्या के कारण साल-दर-साल प्रमुख त्योहार के मौके पर घर लौटने वाले परदेसियों की संख्या कम होती जा रही है.

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