Darbhanga News: कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में कोसी नदी का जलस्तर घटते ही कटाव तेज हो गया है. संभावित बाढ़ का खतरा फिलहाल कम हुआ है, लेकिन नदी की तेज धारा किसानों के लिए नई परेशानी बन गयी है. हर दिन करीब दो से तीन मीटर जमीन नदी में समा रही है. पिछले चार-पांच दिनों में लगभग पांच एकड़ उपजाऊ जमीन नदी की धारा में विलीन हो चुकी है. खेतों में लगी परवल, भिंडी, बैंगन समेत अन्य सब्जियों की तैयार फसल भी बर्बाद हो गयी है.
हरिनाही सीमा क्षेत्र में सबसे अधिक कटाव
कोसी नदी के कटाव का सबसे अधिक असर हरिनाही सीमा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है. यहां सतनारायण दास, नारायण मुखिया, महादेव दास और रामदेव दास समेत कई किसानों की खेती योग्य जमीन नदी में समा चुकी है. ग्रामीणों के अनुसार कटाव प्रभावित क्षेत्र के आसपास करीब आठ से 10 एकड़ में सब्जियों की खेती की गयी है. कटाव की रफ्तार नहीं थमी तो आने वाले दिनों में और अधिक जमीन नदी में समाने की आशंका है.
परवल, भिंडी और बैंगन की तैयार फसल बर्बाद
कटाव की चपेट में आने से किसानों की तैयार सब्जियों की फसल भी नदी में बह गयी. किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत और खेती में लगायी गयी पूंजी कुछ ही पलों में नदी ने निगल ली. फसल बर्बाद होने से किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है. एक ओर खेत खत्म हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर तैयार फसल भी हाथ से निकल गयी.
छोटकी कोनिया और कुंजभवन में भी कटाव की चिंता
इधर छोटकी कोनिया, कुंजभवन और कोनिया गांव के समीप भी कटाव शुरू होने की सूचना है. इससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कटावरोधी कार्य शुरू नहीं कराया गया तो बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि नदी में समा सकती है. साथ ही सब्जी की खेती करने वाले किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.
ग्रामीणों ने की तत्काल कटावरोधी कार्य की मांग
स्थानीय लोगों ने जल संसाधन विभाग से अविलंब कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि नदी की धारा लगातार जमीन को काट रही है. ऐसे में जल्द सुरक्षा उपाय नहीं किये गये तो कटाव को रोकना मुश्किल हो सकता है. किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है.
राजस्व कर्मचारी करेंगे कटाव प्रभावित क्षेत्र का सत्यापन
इस संबंध में अंचलाधिकारी राकेश रोशन भारती ने बताया कि राजस्व कर्मचारी से कटाव प्रभावित क्षेत्र का भौतिक सत्यापन कराया जायेगा. जांच रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित विभाग को कटावरोधी कार्य शुरू कराने के लिए प्रस्ताव भेजा जायेगा. प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का आकलन कराया जा रहा है.
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