Darbhanga News: इंसान की असली पहचान उसके जाने के बाद उसके पीछे छोड़े गए नेक कर्मों से होती है. जब कोई असमय इस दुनिया से विदा होकर भी ऐसा परोपकार कर जाए जिससे दूसरों को नया जीवन मिले, तो वह समाज में सदा के लिए अमर हो जाता है. कुछ ऐसा ही अद्वितीय और अनुकरणीय उदाहरण दरभंगा जिले के कमतौल के एक शोकाकुल परिवार ने पेश किया है, जिसने अपनी जवान बेटी और बहू के मरणोपरांत नेत्रदान (Eye Donation) कर दो दृष्टिहीनों के जीवन में नई रोशनी भरने का महान कार्य किया है.
दुख के पहाड़ के बीच परिजनों का साहसिक फैसला
दरअसल, कमतौल निवासी उदित लिल्हा की 25 वर्षीय पत्नी जनसूर्या कुमारी का शुक्रवार को दरभंगा चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (DMCH) में प्रसव के दौरान असामयिक निधन हो गया था. एक स्वस्थ मासूम बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद जनसूर्या ने अंतिम सांस ली थी, जिससे हंसते-खेलते परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं और परिजनों पर दुखों का वज्रपात हो गया. इस गहरे सदमे, चीख-पुकार और अपार शोक के बीच भी पीड़ित परिवार ने रूढ़िवादी सोच से ऊपर उठकर मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने पूरे मिथिलांचल को गौरवान्वित कर दिया है. परिजनों ने अत्यंत साहसिक निर्णय लेते हुए मृतका जनसूर्या की दोनों आंखें दान करने की इच्छा जताई.
DMCH आई बैंक की टीम ने पूरी की प्रक्रिया
परिजनों की इस महान इच्छा को धरातल पर उतारने के लिए अंगदान और देहदान के क्षेत्र में सक्रिय संस्था ‘दधीचि देहदान समिति’ ने तुरंत पहल की. संस्था के पदाधिकारियों के समन्वय स्थापित करने के बाद डीएमसीएच नेत्र बैंक (Eye Bank) के विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीकी कर्मियों की एक विशेष टीम ने अस्पताल में ही पूरी संवेदनशीलता और वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन करते हुए मरणोपरांत नेत्रदान की आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया. डॉक्टरों ने बताया कि जनसूर्या के कॉर्निया पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं, जिन्हें जल्द ही दो ऐसे जरूरतमंद दृष्टिहीन लोगों की आंखों में प्रत्यारोपित (ट्रांसप्लांट) किया जाएगा जो जन्म से या किसी हादसे के कारण अंधकारमय जीवन जी रहे हैं.
डॉक्टरों ने सौंपा प्रमाणपत्र
नेत्रदान की प्रक्रिया सम्मानपूर्वक संपन्न होने के बाद डीएमसीएच के वरिष्ठ चिकित्सकों और दधीचि देहदान समिति के सदस्यों ने संयुक्त रूप से मृतका के शोकाकुल परिजनों को इस पुण्य कार्य के लिए आधिकारिक ‘नेत्रदान प्रमाणपत्र’ (Certificate of Honour) सौंपा. इस भावुक क्षण के दौरान डॉक्टरों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उनके इस कदम को समाज के लिए एक महान दिशा-निर्देशक बताया. स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और चिकित्सा जगत से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा जनसूर्या के पति उदित लिल्हा और उनके पूरे परिवार के इस दूरगामी व मानवतावादी फैसले की हर स्तर पर भूरि-भूरि सराहना की जा रही है. यह घटना संदेश देती है कि मृत्यु सत्य है, लेकिन मरणोपरांत अंगदान के माध्यम से किसी के जीवन को रोशन करना ही सच्ची ईश्वर सेवा है.
दरभंगा के कमतौल से शिवेंद्र कुमार शर्मा की रिपोर्ट
