दरभंगा के कमतौल से शिवेंद्र कुमार शर्मा की रिपोर्ट
Darbhanga News: जाले प्रखंड क्षेत्र के किसान पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश के बाद धान के बिचड़े को तैयार करने के काम में जुट गए हैं. धान की खेती के लिए रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है. इस नक्षत्र में बिचड़े तैयार करने से किसानों को खरीफ फसल की अच्छी उपज होने की उम्मीद रहती है. वहीं, दूसरी ओर कई किसान मलमास के समाप्त होने के बाद ही बिचड़ा गिराने की बात कहकर अभी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं.
बारिश के बाद खिली धूप, बिचड़ा गिराने के काम में आई तेजी
बीते 25 मई सोमवार को रोहिणी नक्षत्र के आगमन के साथ ही किसान खरीफ फसल की तैयारी में लग गए थे, लेकिन लगातार हो रही बारिश की वजह से बिचड़ा गिराने का काम जोर नहीं पकड़ सका था. अब धूप खिलते ही किसानों ने खेतों का रुख कर लिया है और धान का बिचड़ा तैयार करना शुरू कर दिया है. किसानों का मानना है कि इस नक्षत्र में बिचड़ा डालने से रोपनी समय पर शुरू हो जाती है, जिससे फसल बेहतर होती है.
बाढ़ के खतरे से बचने के लिए अगेती खेती पर जोर
रोहिणी नक्षत्र में बिचड़ा तैयार करने की दूसरी बड़ी वजह भौगोलिक स्थिति है. प्रखंड क्षेत्र के कई गांवों में जमीन समतल नहीं है. भारी बारिश होने पर निचले खेतों में पानी भर जाता है, जिससे रोपनी में देरी होती है. पिछात खेती करने पर फसलों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है. इस नुकसान से बचने के लिए किसान अगेती रोपनी की कोशिश में जुटे हैं. किसान कैलाश यादव और महताब राय ने बताया कि किसानी के लिए 15 दिनों का यह नक्षत्र किसी उत्सव से कम नहीं होता है. भूमि पूजन और खेतों की जुताई के बाद अब तेजी से बिचड़ा डाला जा रहा है.
