दरभंगा. शिक्षा विभाग के माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने बीपीएससी विज्ञापन संख्या 26/2024 के तहत नियुक्त प्रधानाध्यापकों के हित में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि पहले चरण में योगदान देने के बाद शिकायत (ग्रिवांस) के आधार पर दूसरे चरण में पुनः आवंटित विद्यालय में योगदान करने वाले प्रधानाध्यापकों की पूर्व सेवा बाधित नहीं मानी जाएगी. माध्यमिक शिक्षा निदेशक सज्जन आर. द्वारा 14 जुलाई 2026 को जारी पत्र के अनुसार, पहले चरण में आवंटित विद्यालयों में योगदान देने वाले कई प्रधानाध्यापकों ने इ-शिक्षा कोष पोर्टल पर लॉगिन आइडी के माध्यम से ग्रिवांस दर्ज कराया था. शिकायतों की समीक्षा के बाद 77 प्रधानाध्यापकों के आवंटित जिले में संशोधन किया गया और उन्हें दूसरे चरण में नए विद्यालय आवंटित किए गए. विभाग के संज्ञान में आया कि कुछ जिलों में ऐसे प्रधानाध्यापकों से पूर्व सेवा से त्यागपत्र दिलाकर एचआरएमएस को निष्क्रिय (इएनेएक्टिव) कराने की प्रक्रिया अपनाई जा रही थी. इसे अनुचित मानते हुए निदेशालय ने निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में पहले पदस्थापित जिले द्वारा केवल एलपीसी आउट तथा नए पदस्थापित जिले द्वारा एलपीसी इन की कार्रवाई की जाएगी. किसी भी स्थिति में पूर्व सेवा से त्यागपत्र लेने की आवश्यकता नहीं होगी. शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन प्रधानाध्यापकों की सेवा एवं योगदान की तिथि पहले चरण में आवंटित विद्यालय में योगदान की तिथि ही मानी जाएगी. इस आदेश से ग्रिवांस के आधार पर पुनः पदस्थापित प्रधानाध्यापकों की सेवा निरंतरता और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर बनी असमंजस की स्थिति समाप्त होने की उम्मीद है.
कैंपस: बीपीएससी प्रधानाध्यापकों की सेवा नहीं होगी बाधित, पहले चरण की योगदान तिथि ही रहेगी मान्य
जाले. महाकवि कालिदास सूर्यदेव महाविद्यालय (एमकेएस कॉलेज) त्रिमुहान चंदौना के मुख्य द्वार पर लगे नेम प्लेट से उर्दू भाषा में महाविद्यालय का नाम हटाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. उर्दू प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे बिहार की दूसरी राजकीय भाषा की उपेक्षा बताते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है.

सांकेतिक तस्वीर