Darbhanga Patliputra Intercity Train: गाड़ी संख्या 15507/15508 दरभंगा-पाटलिपुत्र मेमू इंटरसिटी एक्सप्रेस का ठहराव बाजपट्टी और डुमरा रेलवे स्टेशन पर भी होगा. पूर्व मध्य रेलवे ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. रेलवे की ओर से जल्द ही ऑफिसियल आर्डर और टाइम-टेबल जारी किया जाएगा.
लंबे समय से हो रही थी मांग
बाजपट्टी और डुमरा स्टेशन पर इस ट्रेन के ठहराव की मांग काफी समय से उठ रही थी. इलाके के लोगों ने कई बार रेलवे से इसकी मांग की थी. सीतामढ़ी के जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने इस मामले को गंभीरता से उठाया और रेलवे अधिकारियों से मुलाकात कर स्थानीय लोगों की परेशानी बताई.
सांसद की पहल के बाद रेलवे मंत्रालय ने दोनों स्टेशनों पर ट्रेन रोकने की सहमति दे दी. सांसद ने यह भी बताया कि गाढ़ा स्टेशन पर ठहराव को लेकर भी तकनीकी जांच चल रही है और उस पर विचार किया जा रहा है.
पटना जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा
दरभंगा-पाटलिपुत्र मेमू इंटरसिटी उत्तर बिहार के लोगों के लिए पटना पहुंचने का एक अहम साधन मानी जाती है. यह ट्रेन दरभंगा से सुबह 2:40 बजे खुलती है और सुबह करीब 8 बजे पाटलिपुत्र जंक्शन पहुंचती है.
अब तक बाजपट्टी और डुमरा के यात्रियों को यह ट्रेन पकड़ने के लिए दूसरे स्टेशनों तक जाना पड़ता था. खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को काफी परेशानी होती थी. अब नए ठहराव शुरू होने से लोग अपने नजदीकी स्टेशन से सीधे ट्रेन पकड़ सकेंगे.
लाखों लोगों को होगा फायदा
इस फैसले से सीतामढ़ी और आसपास के करीब 3 से 5 लाख लोगों को फायदा मिलेगा. डुमरा स्टेशन जिला मुख्यालय के पास स्थित है, जहां कलेक्ट्रेट, कोर्ट और कई सरकारी कार्यालय हैं. यहां ट्रेन रुकने से कर्मचारियों, अधिकारियों और वकीलों को काफी सहूलियत मिलेगी. बाजपट्टी इलाके के लोगों को भी सीधा लाभ होगा. पुपरी, सुरसंड और चोरौत जैसे इलाकों के ग्रामीण अब आसानी से पटना जा सकेंगे.
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रोज हजारों लोग करते हैं सफर
दरभंगा-पाटलिपुत्र मेमू इंटरसिटी इस रूट की सबसे व्यस्त ट्रेनों में गिनी जाती है. रोजाना करीब 2500 से 3500 यात्री इस ट्रेन से सफर करते हैं.
पटना इलाज कराने जाने वाले मरीज, व्यापारिक काम से जाने वाले कारोबारी और पढ़ाई करने वाले छात्र बड़ी संख्या में इस ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं. यही वजह है कि इसे उत्तर बिहार के लोगों के लिए लाइफलाइन माना जाता है.
यह ट्रेन पूरी तरह जनरल श्रेणी की है और आधुनिक मेमू रैक से चलाई जाती है. ट्रेन में आमतौर पर 8 से 12 कोच लगाए जाते हैं. इसमें लगभग 1500 से 2000 यात्रियों के सफर करने की क्षमता होती है.
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