Buxar News : अब बक्सर में नहीं बनेगा वाहन का फिटनेस, जाना होगा सासाराम
अब जिले के वाहन मालिकों को वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाने के लिए करीब 159 किमी दूर सासाराम जाना होगा.
प्रशांत कुमार राय, बक्सर
अब जिले के वाहन मालिकों को वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाने के लिए करीब 159 किमी दूर सासाराम जाना होगा. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद बुधवार से बक्सर में वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद कर दी गयी है. इस फैसले से जिले के व्यवसायिक वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ गयी है. अब तक बक्सर जिला परिवहन कार्यालय में व्यवसायिक वाहनों की फिटनेस जांच की पूरी व्यवस्था मौजूद थी. हर माह करीब 100 से अधिक व्यवसायिक वाहनों की जांच यहीं की जाती थी. परिवहन विभाग के मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से वाहन के आगे, पीछे, दाएं, बाएं और स्टेयरिंग सहित छह फोटो ऑनलाइन अपलोड कर फिटनेस प्रक्रिया पूरी की जाती थी. इस व्यवस्था से वाहन मालिकों का समय और पैसा दोनों की बचत होती थी. नये आदेश के तहत बक्सर जिले को रोहतास जिले के सासाराम स्थित जावेद आलम ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर से टैग कर दिया गया है. अब जिले के सभी व्यवसायिक वाहन मालिकों को फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए वहीं जाना अनिवार्य कर दिया गया है. इससे वाहन संचालकों पर आर्थिक और प्रशासनिक बोझ काफी बढ़ गया है. फिटनेस जांच के अलावा ईंधन, टोल टैक्स, भोजन और समय पर भी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा. खासकर छोटे वाहन मालिकों, ऑटो चालकों और यात्री बस संचालकों के लिए यह व्यवस्था बड़ी समस्या बन गई है. कई ऑटो और बसों का परमिट सीमित रूट का होता है. ऐसे में जिन वाहनों के पास बक्सर से रोहतास रूट का परमिट नहीं है, उन्हें फिटनेस जांच के लिए सासाराम ले जाने पर रास्ते में चालान और जुर्माने का खतरा बना रहेगा. इस स्थिति में वाहन मालिकों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ सकती है. ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष मिंटू राय ने बताया कि फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सासाराम जाने पर एक वाहन पर लगभग पांच हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ सकता है. छोटे वाहनों को वहां तक ले जाना और वापस लाना काफी मुश्किल होगा. उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला व्यावहारिक नहीं है और इससे वाहन मालिकों की समस्याएं बढ़ेंगी. ट्रांसपोर्ट यूनियन ने इस फैसले का विरोध करते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है. वाहन मालिकों का कहना है कि यदि जिले में पहले से मौजूद व्यवस्था को बहाल नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर परिवहन व्यवस्था पर पड़ेगा. इससे आम यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
