Buxar News: बंदूक के बल पर फसल उठा ले गये यूपी के किसान

यूपी-बिहार की सीमा पर फसल पकने के साथ दोनों राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाला तनाव उस वक्त बढ़ गया. जब बंदूक के बल पर कटी फसल पर डाका पड़ गया.

ब्रह्मपुर. यूपी-बिहार की सीमा पर फसल पकने के साथ दोनों राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाला तनाव उस वक्त बढ़ गया. जब बंदूक के बल पर कटी फसल पर डाका पड़ गया. यूपी से आए दबंगों किसानों ने फसल कटाई कर रहे बिहार के नैनीजोर के किसानों को जमकर धुनाई हुई व बंदूक के बल पर हवाई फायरिंग करके भगाने के साथ ही कटी फसल लेकर चले गये. यूपी के दबंग किसानों की इस करतूत से बिहार के किसानों के बीच हड़कंप मच गया, वहीं किसान भी जान बचाने के लिए खेत छोड़कर भाग गए. हल्दी थाना क्षेत्र के वधउच मौजा के दियारा क्षेत्र में फसल काटने के विवाद में यूपी के गायघाट और बिहार के नैनीजोर के किसानों के बीच मारपीट हुई. इसमें नैनी जोर के आधा दर्जन किसान घायल हो गए हैं. यूपी के किसानों ने हवाई फायरिंग की. गायघाट दियारे क्षेत्र में फसल को लेकर बिहार के नैनीजोर के किसानों के साथ अक्सर मारपीट होती है. गायघाट के किसान सरसों व गेहूं की फसल की कटाई करवा रहे थे. उसी दौरान यूपी के गाय घाट के किसान लाठी डंडे व हथियार लेकर पहुंचे और नैनी जोर के किसानों की पिटाई कर दी. जुल पासवान, भिषमा यादव,लक्षमन यादव, श्रीकांत यादव, इस मारपीट में घायल होने के साथ ही बेहोश हो गये. बेहोशी के हालत में परिजनों द्वारा नैनी जोर थाना लाया गया. जहां पुलिस अभिरक्षा में इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया. फसल काटने को लेकर गरजती रही हैं बंदूकें वर्षों से शांत पड़े बिहार- यूपी सीमा विवाद की आग फिर सुलगने लगी है. यूपी के किसानों ने बिहार के बक्सर जिले के नैनीजोर गांव के आधा दर्जन किसानों को मारपीट कर फसल कटाई को लेकर सीमावर्ती गांवों के किसानों के बीच तनाव गहरा गया है. ऐसी स्थिति में फसल काटने को लेकर दोनों राज्यों के किसानों के बीच फिर से बंदूकें गरजने की संभावना दिखने लगी है. दोनों तरफ के किसानों ने टकराव की स्थिति को देखते हुए उससे निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी है .अंग्रेजों के शासन काल से बिहार- यूपी के सीमा विवाद को लेकर दोनों ही राज्यों के दर्जनों किसान मारे गए. केंद्र सरकार द्वारा गठित त्रिवेदी आयोग की अनुशंसा पर नैनीजोर के किसानों की पांच हजार एकड़ यूपी के बलिया जिले की सीमा क्षेत्र में चली गई और उस जमीन पर किसान वर्षों से अपनी खेती बारी करते चले आ रहे हैं.

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