कृत्रिम गर्भाधान को लेकर पशुपालन विभाग में प्रशिक्षुओं की त्रैमासीय ट्रेनिंग शुरू

डुमरांव में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन परियोजना के तहत मैत्री (मल्टीपर्पज आर्टिफिशियल इन्सेमिनेशन टेक्नीशियन इन रूरल इंडिया) प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया.

डुमरांव. डुमरांव में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन परियोजना के तहत मैत्री (मल्टीपर्पज आर्टिफिशियल इन्सेमिनेशन टेक्नीशियन इन रूरल इंडिया) प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया. इस त्रैमासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और वैज्ञानिक कृत्रिम गर्भाधान सेवा उपलब्ध कराना है, ताकि पशुधन की नस्ल में सुधार हो सके और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो. कार्यक्रम को लेकर प्रशिक्षुओं और पशुपालकों में खासा उत्साह देखा गया. इस अवसर पर पशुपालन विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ सिकंदर यादव एवं डॉ प्रकाश कुमार चौधरी ने संयुक्त रूप से प्रशिक्षण की रूपरेखा और इसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. डॉ सिकंदर यादव ने बताया कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य देशी पशु नस्लों का संरक्षण, संवर्धन तथा उनकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना है. इसी उद्देश्य को धरातल पर उतारने के लिए मैत्री प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, ताकि प्रशिक्षित तकनीशियन गांव-गांव तक पहुंच सकें. उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित प्रशिक्षु भाग ले रहे हैं. सभी प्रशिक्षुओं को कुल 90 दिनों का गहन प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिसमें 30 दिनों का क्लासरूम आधारित सैद्धांतिक प्रशिक्षण तथा 60 दिनों का फील्ड एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण शामिल है. क्लासरूम प्रशिक्षण के दौरान पशुओं की उन्नत और देशी नस्लों की पहचान, कृत्रिम गर्भाधान की आधुनिक तकनीकें, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित आहार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपाय, सामान्य व संक्रामक रोगों की पहचान तथा प्राथमिक उपचार की विस्तृत जानकारी दी जा रही है. साथ ही प्रशिक्षुओं को पशुपालकों से संवाद कौशल और सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा करने के तरीकों से भी अवगत कराया जा रहा है. वहीं फील्ड प्रशिक्षण के दौरान वास्तविक परिस्थितियों में कृत्रिम गर्भाधान की पूरी प्रक्रिया, उपकरणों का सुरक्षित उपयोग, स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, रिकॉर्ड संधारण और व्यावहारिक समस्याओं से निपटने का अनुभव कराया जा रहा है. डॉ प्रकाश कुमार चौधरी ने बताया कि प्रशिक्षण अवधि पूरी होने के बाद सभी प्रशिक्षुओं का मूल्यांकन किया जायेगा. सफल प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे, जिससे वे ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं से जुड़कर स्वरोजगार प्राप्त कर सकेंगे. अधिकारियों ने कहा कि प्रशिक्षित मैत्री कार्यकर्ता ग्रामीण पशुपालकों के लिए पहली कड़ी के रूप में कार्य करेंगे, जिससे दूध उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इस अवसर पर बेगूसराय, मुजफ्फरपुर सहित अन्य जिलों के प्रशिक्षु भी उपस्थित रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Amlesh prasad

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >