नदांव मध्य विद्यालय में छात्र-शिक्षक के अनुपात में शिक्षकों की संख्या काफी अधिक

जिला मुख्यालय से सटे नदांव मध्य विद्यालय में छात्र शिक्षकों का अनुपात काफी अधिक है.

By AMLESH PRASAD | January 15, 2026 10:41 PM

बक्सर. जिला मुख्यालय से सटे नदांव मध्य विद्यालय में छात्र शिक्षकों का अनुपात काफी अधिक है. चालिस छात्रों पर एक शिक्षक की बजाय नदांव विद्यालय में करीब 20 छात्रों पर एक शिक्षक की नियुक्ति की गई हैै. पूर्व से 25 शिक्षक कार्यरत थे. वहीं इस बीच पांच शिक्षकों का फिर से पदस्थापना किया गया है. जिसमें चार शिक्षकों ने योगदान भी कर लिया है. इसके साथ बुधवार को चार शिक्षकों के योगदान के बाद कुल 29 संख्या हो गई है. वहीं एक अन्य शेष बीपीएससी शिक्षक के आज नियुक्ति होने की संभावना है. जिसके बाद विद्यालय में कुल 30 शिक्षकों की संख्या हो गई जायेगी. यह शिक्षकों का अनुपात छात्रों के निर्धारित अनुपात से ज्यादा है. ज्ञात हो कि विद्यालय में पहली से पांचवीं तक के 229 नामांकित छात्र-छात्राओं के लिए कुुल 25 शिक्षक की तैनाती है. जबकि 6 से 8 के लिए कुल नामांकिन 346 छात्र-छात्राओं के लिए कुल पांच शिक्षकों की तैनाती है. ज्ञात हो कि पहली से पांचवीं तक के लगभग 10 बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक की नियुक्ति की गई है. वहीं छठवीं से 8वीं तक के 345 नामांकित छात्रों के लिए कुल पांच शिक्षकों की तैानती की गयी है. शिक्षकों की तैनाती विद्यालय में दोषपूर्ण तरीके से की गयी है. जिसके कारण 6वीं से 8वीं तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की भारी कमी है. छठवीं से आठवीं तक के 69 बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक की तैनाती की गई है. जिससे प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षकों के सहारे ही मध्य विद्यालय के छात्रों की पढ़ाई निर्भर है. मध्य विद्यालय में केवल हिंदी के एक, संस्कृत के एक, विज्ञान के एक एवं सामाजिक विज्ञान के दो शिक्षकों से ही पढ़ाई पूरी होती है. वहीं विद्यालय में छठवीं से आठवीं तक के छात्रों को पढ़ाने के लिए अंग्रेजी एवं विज्ञान के एक विषय को छोड़ अन्य विषय के शिक्षक नहीं है. वहीं इस संबंध में मध्य विद्यालय नदांव के प्रधानाध्यापक डॉ सुरेंद कुमार सिंह ने बताया कि यह नियुक्ति ऐप के माध्यम से एकीकृत हुआ है. वहीं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर नव नियुक्त शिक्षकों के साथ ही सभी शिक्षकों के साथ बैठक कर चर्चा की गयी. जिससे विद्यालय आने वाले छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके और वे अंतिम घंटी तक कक्षाओं में शामिल रह सके.

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