फाल्गूनी पशु मेले का आयोजन बना प्रशासन के लिए चुनौती

बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ की पावन नगरी में फाल्गुनी शिवरात्रि की आहट के साथ ही ऐतिहासिक पशु मेले की बिसात बिछने लगी है.

ब्रह्मपुर. बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ की पावन नगरी में फाल्गुनी शिवरात्रि की आहट के साथ ही ऐतिहासिक पशु मेले की बिसात बिछने लगी है. लेकिन इस बार चर्चा मेले की भव्यता से ज्यादा नगर पंचायत के गलियारों में चल रही नूरा-कुश्ती की है. सवाल बड़ा है कि क्या सदियों पुराना यह मेला अपनी सांस्कृतिक गरिमा को वापस पाएगा, या एक बार फिर जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों की कमाई की चारागाह बनकर दम तोड़ देगा. मेले के आयोजन को लेकर नगर पंचायत दो खेमों में तब्दील हो चुका है. सूत्रों की मानें तो एक खेमा जहां पुरानी परंपराओं (पर्दे के पीछे की बंदरबांट) को बरकरार रखना चाहता है, वहीं दूसरा खेमा वर्चस्व की जंग में अपनी मूंछ ऊंची रखने की जुगत में है. जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार भी ठेके-पट्टों का वितरण मैनेजमेंट के आधार पर होगा या पारदर्शिता की कोई नई इबारत लिखी जायेगी.

लिटमस टेस्ट पर शिव शक्ति कुमार की छवि : नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी शिव शक्ति कुमार ने अपनी अल्प अवधि में एक ईमानदार और सख्त अधिकारी के रूप में पहचान बनायी है. लेकिन ब्रह्मपुर का फाल्गुनी मेला उनके लिए कांटों भरा ताज साबित होने वाला है. स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि यह मेला ही तय करेगा कि कार्यपालक पदाधिकारी सिस्टम के दबाव के आगे झुकते हैं या अपनी क्लीन इमेज से बिचौलियों के गठजोड़ को ध्वस्त करते हैं. नगर की उम्मीदें शिव शक्ति कुमार पर टिकी हैं. चुनौती केवल मेला कराने की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के उस सिंडिकेट को तोड़ने की है जो सालों से सरकारी राजस्व को दीमक की तरह चाट रहा है.

तीन मोर्चों पर फंसी है विकास की गाड़ी सुविधा या शोषण :

दूर-दराज से आने वाले पशुपालकों को पानी और सुरक्षा मिलेगी या उनके नाम पर होने वाले आवंटन में सेंधमारी होगी. हर साल मेले से लाखों का राजस्व आता है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा बिचौलियों की भेंट चढ़ जाता है. इस बार इसे रोकने के लिए क्या पुख्ता इंतजाम हैं कि कागजी राजस्व का तिलिस्म में सब गुण हों जायेगा. जनप्रतिनिधियों की दखलंदाजी और प्रशासनिक कार्यशैली के बीच का टकराव मेले की साख पर भारी पड़ सकता है. ब्रह्मपुर का यह फाल्गुनी मेला केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत की पहचान है. अगर इस साल भी नगर पंचायत के कतिपय लोगों की जेबें भरने के लिए मेले की बलि चढ़ायी गयी, तो यह न केवल जनता के साथ विश्वासघात होगा, बल्कि प्रशासन की साख पर भी गहरा धब्बा लगेगा. अब सबकी नजरें कार्यपालक पदाधिकारी के अगले कदम पर हैं क्या वे जन-अपेक्षाओं के अनुरूप मेले को भ्रष्टाचार मुक्त कर पायेंगे.

क्या कहते हैं अधिकारी

फाल्गूनी पशु मेले को लेकर तैयारियां तेज कर दी गयी है. मेले को लेकर तमाम कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है. नियमानुसार ही मेला का आयोजन किया जायेगा.

शिव शक्ति कुमार, कार्यपालक अभियंता, ब्रह्मपुर नगर पंचायत

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By Amlesh prasad

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