मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत जिले में प्राप्त हुए थे 841 आवेदन जिसमें से 673 आवेदन विभाग ने कर दिया है स्वीकृत

वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 841 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 673 किसानों के आवेदन स्वीकृत कर लिये गये हैं.

बक्सर. राज्य सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत जिले के किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निजी नलकूप योजना का लाभ अनुदान के साथ लघु सिचाई विभाग उपलब्ध करा रहा है. जिसके लिए लघु सिचाई विभाग के द्वारा विभाग के वेबसाइट पर आवेदन मांगा गया था. वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 841 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 673 किसानों के आवेदन स्वीकृत कर लिये गये हैं. अब तक 282 लाभुक किसानों के बैंक खाते में अनुदान की राशि प्राप्त हो गया है. राज्य सरकार ने जल संकट और सिंचाई के पारंपरिक संसाधनों पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना की शुरुआत की थी. इस योजना के तहत योग्य किसानों को निजी बोरिंग या ट्यूबवेल स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. योजना का मुख्य उद्देश्य उन किसानों को सशक्त बनाना है जिनके पास निजी खेत हैं लेकिन सिंचाई की सुविधा नहीं है. इस योजना के तहत बक्सर जिले में किसानों की ओर से काफी उत्साह देखने को मिला. जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए कुल 841 आवेदनों में से विभागीय जांच एवं स्थल निरीक्षण के बाद 673 आवेदन स्वीकृत किये गये. अब तक 282 किसानों को अनुदान की राशि उपलब्ध करायी जा चुकी है, जिससे वे अपने खेतों में निजी नलकूप की स्थापना कर पाए हैं. इससे उनकी कृषि निर्भरता मानसून पर कम हुई है और वर्ष भर खेती करने की सुविधा मिली है.

विभागीय प्रयास और पारदर्शिता बनी योजना की सफलता की कुंजी : लघु सिचाई विभाग के अनुसार, योजना के तहत आवेदन, स्थल निरीक्षण, अनुदान स्वीकृति और राशि अंतरण की सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से की जा रही हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचा जा सकें. इसके अतिरिक्त विभागीय कर्मियों द्वारा समय-समय पर लाभुक किसानों के खेतों का निरीक्षण भी किया जाता है, ताकि अनुदान का दुरुपयोग न हो और वास्तविक किसान ही इसका लाभ उठा सकें.

शेष किसानों को जल्द मिलेगी राशि : लघु सिचाई विभाग कार्यपालक अभियंता रंजीत कुमार ने बताया कि शेष स्वीकृत किसानों में से शेष 391 किसानों को भी नियमानुसार अनुदान की राशि शीघ्र उपलब्ध करा दी जायेगी. कुछ मामलों में कागजी प्रक्रिया या भूमि स्वामित्व से संबंधित दस्तावेजों की देरी के कारण भुगतान में विलंब हुआ है, जिसे जल्द दूर कर लिया जायेगा. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम है. जो किसान सिंचाई की सुविधा से वंचित थे, वे अब पूरे साल खेती कर सकेंगे. इससे न केवल उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि उनकी आमदनी भी दोगुनी हो सकती है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल : इस योजना के जरिये किसानों को दी जा रही सहायता से कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी. जब किसान सिंचाई के लिए खुद सक्षम होंगे, तो बारिश की अनिश्चितता उनके उत्पादन को प्रभावित नहीं कर पायेगी. इससे न केवल खेतों की उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि फसलों की विविधता भी देखने को मिलेगी. साथ ही, इस योजना के माध्यम से जिले में कृषि यंत्रों और बोरिंग से संबंधित दुकानों, सेवा प्रदाताओं और श्रमिकों को भी रोजगार मिला है.एक निजी नलकूप की स्थापना में न केवल बोरिंग मशीन की आवश्यकता होती है, बल्कि पाइप, मोटर, बिजली की व्यवस्था आदि में भी स्थानीय संसाधनों की खपत होती है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है. मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना ने बक्सर जिले में किसानों के बीच एक नई उम्मीद जगायी है. यह योजना न केवल सिंचाई की समस्या का समाधान दे रही है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर कृषि उत्पादन को बढ़ावा भी दे रही है.

किस प्रखंड से कितना आया है आवेदन और कितना हुआ है स्वीकृत

प्रखंड प्राप्त आवेदन स्वीकृत

सिमरी 81 40

चक्की 2 1

ब्रह्मपुर 194 151

चौगाईं 20 17

केसठ 18 13

डुमराँव 187 154

बक्सर 40 33

चौसा 16 13

राजपुर 144 133

इटाढ़ी 86 79

नवानगर 53 39

कहते हैं अधिकारी

मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत वित्तीय वर्ष 24 -25 में कुल विभाग के वेबसाइट पर 841 आवेदन प्राप्त हुआ था. जिसमें 834 आवेदनों का स्थल जांच किया गया है. स्थल जांच करने के बाद 673 आवेदन का स्वीकृति प्रदान की गयी थी. 673 आवेदन की स्वीकृति देने के बाद अभी तक 332 किसानों ने अपना दवा किया है. जिसमें से 282 किसानों के खाते में अनुदान कि राशि भेज दिया गया. शेष किसानों से आग्रह किया गया है दावा करे ताकि अनुदान कि राशि उनके खाते में भेजा जाये.

रंजीत कुमार, कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग, बक्सर

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Published by: Amlesh prasad

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