buxar news : मृतक की पत्नी को 10 लाख रुपये मुआवजा व 2900 रुपये मासिक पेंशन देगी कंपनी

buxar news : 25 वर्ष की आयु तक दो बच्चों की पढ़ाई के लिए 750 रुपये महीने की दी जायेगी सहायतामजदूर नेताओं के दबाव में मृतक के परिजनों को मिला मुआवजे का लिखित आश्वासन

buxar news : चौसा. थर्मल पावर प्लांट में हुए हादसे में मजदूर की मौत के मामले में मजदूर संगठनों और विरोध-प्रदर्शन के दबाव के बाद पावर मेक कंपनी ने मृतक के परिजनों को मुआवजा देने का लिखित आश्वासन दिया. गुरुवार की मध्य रात के बाद पुलिस द्वारा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.

पावर मेक कंपनी ने मृत मजदूर की पत्नी संगीता देवी को कुल 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आश्वासन दिया है, जिसमें डेढ़ लाख रुपये तत्काल अंतिम संस्कार के लिए, जबकि शेष 8.5 लाख रुपये 10 दिनों के भीतर डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से पत्नी के खाते में जमा होगा. इसके अतिरिक्त, थर्मल पावर की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी एसजेवीएम और एलएंडटी द्वारा स्टाफ सहयोग राशि के रूप में पांच लाख रुपये दिये जायेंगे.

कंपनी ने मृतक की पत्नी को आजीवन 2900 रुपये मासिक पेंशन देने की भी घोषणा की है. मृतक के दो बच्चों को पढ़ाई के लिए 750 रुपये प्रतिमाह की सहायता 25 वर्ष की आयु तक दी जायेगी. कुल मिलाकर, कंपनी ने मृत मजदूर के परिवार को 26 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि देने का लिखित आश्वासन दिया है. यह समझौता प्लांट में कार्यरत हजारों मजदूरों के विरोध के बाद ही संभव हो पाया. मजदूरों के विरोध की सूचना पर इंटक, मजदूर और किसान नेता रामप्रवेश सिंह यादव देर रात तक कंपनी प्रबंधन पर दबाव बनाया, जिसके बाद लिखित आश्वासन मिला.

तय मजदूरी व मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं : इंटक नेता

मजदूर नेता रामप्रवेश सिंह यादव ने कंपनी और ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि थर्मल पावर निर्माण कार्य में सेफ्टी नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है. खराब मौसम में भी ऊंचाई पर काम करने के लिए दबाव डाला जाता है. बिना पास और सुरक्षा उपकरणों के मजदूरों से काम लिया जाता है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो मजदूर आंदोलन और तेज किया जायेंगे. सबसे बड़ा सवाल यह है कि कंपनी के अंदर मजदूरों के जीवन से खिलवाड़ हो रहा है. सुरक्षा के नाम पर जीरो है.

मजदूरों का शोषण इस कदर हो रहा है कि अक्तूबर माह का पेमेंट आज तक भुगतान नहीं हुआ है. साथ ही साथ आठ घंटे के बजाय 12 घंटे काम लिया जाता है और सिर्फ आठ घंटे का ही भुगतान किया जाता है. ओवर टाइम करने पर डबल मजदूरी दी जाती है, लेकिन सिर्फ सिंगल मजदूरी दी जाती है और मजदूरों को बोर्ड रेट के हिसाब से मजदूरी मिलनी चाहिए. लेकिन बोर्ड रेट का भी कंपनी द्वारा धज्जियां उड़ाया जाता है. मजदूरों को बोर्ड रेट के हिसाब से मजदूरी नहीं दी जाती है. इन सभी विषयों को ध्यान में रखते हुए नजदीकी समय में मजदूरों के हित में एक बहुत बड़ा आंदोलन किया जायेगा. मजदूरों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Shailesh kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >