Buxar News : जयभोले ग्रुप एवं पंडा समाज, बक्सर के तत्वावधान में श्रीरामेश्वर मंदिर प्रांगण में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का भव्य आयोजन हुआ. प्रख्यात कथावाचक प्रेमाचार्य पीतांबर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के प्राकट्य की कथा सुनाई. जैसे ही कथा में भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग आया, पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से भर उठा. मंगलगीत और सोहर की प्रस्तुति पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने लगे.
धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए हुआ श्रीराम का अवतार
कथा का वर्णन करते हुए प्रेमाचार्य पीतांबर जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम को श्रीहरि का सातवां अवतार माना गया है. उन्होंने अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लिया. उन्होंने भगवान श्रीराम के जन्म से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को कई ऐसे प्रसंगों की जानकारी दी, जिनसे सामान्य लोग कम परिचित हैं.
पुत्र प्राप्ति की कामना से महाराज दशरथ ने कराया था यज्ञ
कथावाचक ने बताया कि अयोध्या के महाराज दशरथ पुत्र प्राप्ति की कामना से यज्ञ कराने के लिए संकल्पित हुए थे. इसके लिए श्यामकर्ण घोड़े को चतुरंगिनी सेना के साथ छोड़ा गया. देशभर के विद्वान ऋषि-मुनियों, तपस्वियों और वेदों के प्रकांड विद्वानों को यज्ञ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया.
यज्ञ के अवसर पर महाराज दशरथ अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ तथा अंगदेश के अधिपति लोमपाद के जामाता ऋंग ऋषि सहित यज्ञ मंडप में पहुंचे. विधि-विधान से यज्ञ संपन्न होने के बाद ब्राह्मणों, ऋषियों और विद्वानों को धन-धान्य, गौ आदि दान देकर सम्मानपूर्वक विदा किया गया.
बच्चों को बचपन से दें संस्कार और सदाचार की शिक्षा
प्रेमाचार्य पीतांबर जी महाराज ने कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन के व्यवहारिक संस्कारों का संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि किसी ऐसे स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले विचार करना चाहिए, जहां अपने, अपने इष्ट या गुरु के अपमान की आशंका हो. ऐसी स्थिति में वहां जाना उचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को बचपन से ही भक्ति, संस्कार और सदाचार की शिक्षा देने की आवश्यकता है. बचपन कच्ची मिट्टी के समान होता है. इसे जिस रूप में ढाला जाता है, वही संस्कार आगे चलकर व्यक्तित्व का आधार बनते हैं. इसलिए बच्चों में धर्म, संस्कृति, संस्कार और अच्छे आचरण के बीज बचपन से ही बोने चाहिए.
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के दौरान मंदिर परिसर जय श्रीराम के जयघोष और भक्ति गीतों से गूंजता रहा.
