Buxar News : ब्रह्मपुर में स्वाद के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़

ब्रह्मपुर प्रखंड में स्थानीय दुकानदार मुनाफे की अंधी दौड़ में मसालों के बजाय खतरनाक रसायनों का उपयोग कर रहे हैं.

ब्रह्मपुर. ब्रह्मपुर प्रखंड में स्थानीय दुकानदार मुनाफे की अंधी दौड़ में मसालों के बजाय खतरनाक रसायनों का उपयोग कर रहे हैं. जिसे लोग शुद्ध हल्दी समझकर खाते हैं, वह असल में चटक पीला सिंथेटिक रंग” है, जो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है. नगर पंचायत ब्रह्मपुर स्थित बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर के आसपास यह खेल सबसे अधिक सक्रिय है. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु प्रसाद और नाश्ता ग्रहण करते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि उनकी थाली में ”धीमा जहर” परोसा जा रहा है. स्थानीय होटलों और चौक-चौराहों पर आलू-दम, छोले और मटर जैसी सब्जियों में हल्दी की जगह “मेटानिल येलो ” जैसे प्रतिबंधित रंग का इस्तेमाल हो रहा है. ग्रामीण और जागरूक ग्राहक बताते हैं कि इन दुकानों पर मिलने वाली सब्जी का रंग इतना गहरा और अप्राकृतिक होता है कि हाथ धोने पर भी आसानी से नहीं जाता. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक इन रसायनों के सेवन से लिवर कैंसर, किडनी की समस्या, पेट के अल्सर और बच्चों के मानसिक विकास में बाधा हो सकती है. हालांकि, खाद्य सुरक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह मौन हैं. प्रखंड मुख्यालय के नजदीक इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए अब तक कोई सैंपलिंग या छापेमारी नहीं की गयी है. स्थानीय ग्रामीणों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. आरटीआइ कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह ने कहा कि मंदिर के आसपास के होटलों की औचक जांच कर सैंपल लैब भेजे जाएं और दोषी दुकानदारों पर कानूनी कार्रवाई की जाये. यदि प्रशासन नहीं जागा, तो ब्रह्मपुर का यह ”धीमा जहर” किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी का कारण बन सकता है.

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By Shah abid hussain

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