बक्सर के पूर्व डीएम अंशुल अग्रवाल, एसपी मनीष कुमार समेत कई के खिलाफ नोटिस जारी

परिवाद पत्र को मुफस्सिल थाना के बनारपुर गांव की रहने वाली रंजना देवी, पति संजय तिवारी ने दाखिल किया है.

बक्सर कोर्ट. बक्सर जिला के पूर्व जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल, पूर्व एसपी मनीष कुमार, पूर्व सदर एसडीएम धीरेंद्र कुमार मिश्रा, सदर एसडीपीओ धीरज कुमार, अशोक कुमार (प्रखंड विकास पदाधिकारी, चौसा), चंदन कुमार यादव (पूर्व थानाध्यक्ष, बक्सर मुफस्सिल) समेत अन्य 60-70 पुलिस प्रशासन के लोग जिनमें दारोगा भी सम्मिलित हैं, के खिलाफ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में परिवाद पत्र संख्या 534/सी/2025 दाखिल किया गया था जिसकी पिछले दिनों सुनवाई करने के बाद न्यायाधीश ने सभी आरोपितों के खिलाफ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है. परिवाद पत्र को मुफस्सिल थाना के बनारपुर गांव की रहने वाली रंजना देवी, पति संजय तिवारी ने दाखिल किया है. परिवाद पत्र में कुल 22 गवाहों के नाम का हवाला भी दिया गया है. इस आशय की जानकारी देते हुए आवेदक के अधिवक्ता शशिकांत उपाध्याय ने बताया कि न्यायालय ने अभियोग पत्र को ग्रहण करने के साथ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है. घटना 20 मार्च 2024 की है. दाखिल परिवाद पत्र के अनुसार घटना की शाम लगभग 6:00 बजे सभी प्रशासनिक पदाधिकारी आवेदिका के गांव पहुंच गये जो हेलमेट एवं सुरक्षा जैकेट पहने हुए थे तथा ग्रामीणों, पीड़िता एवं अन्य गवाहों को ऊपर जमकर हमला किया था. परिवाद पत्र में अन्य कई संगीन आरोप भी प्रशासनिक पदाधिकारियों पर लगाये गये हैं. कोर्ट ने दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का दिया था आदेश बक्सर कोर्ट. 20 मार्च 2024 को जिला प्रशासन पटना उच्च न्यायालय के एक आदेश को लेकर चौसा पावर प्लांट पहुंची थी जहां कई दिनों से धरना एवं आंदोलन चल रहा था. पुलिस को देख आंदोलनकारी उग्र हो गये तथा उन्होंने औरतें एवं बच्चों की मदद लेकर पुलिस बल पर हमला कर दिया जिसमें कई पुलिस वाले जख्मी हो गये थे. उक्त मामले को लेकर सूचक चंदन कुमार यादव ने बक्सर मुफस्सिल थाना में कांड संख्या 101 /2024 दर्ज करायी थी. पुलिस ने कांड में शामिल 22 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में लायी थी जहां कोर्ट ने गिरफ्तार लोगों के चोटिल होने की वजह पूछा तथा हाथों हाथ सिविल सर्जन के साथ अन्य दो चिकित्सकों का बोर्ड बनाकर इंजरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया जो कुछ घंटों में ही न्यायालय को प्राप्त हो गया था. इसे गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने आदेश दिया कि अभियुक्तों के साथ पुलिस का व्यवहार युक्ति युक्त नहीं रहा है. अतः घटना की जांच पुलिस अधीक्षक डीएसपी रैंक के अधिकारी से करा कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिक दर्ज करें. पारित आदेश को ऊपरी न्यायालय में दिया गया था चुनौती मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा पारित आदेश दिनांक 23 मार्च 2024 के खिलाफ बिहार राज्य ने ऊपरी अदालत में क्रिमिनल रिवीजन 63 /2024 दाखिल कर सीजेएम के आदेश को चुनौती दिया तथा कोर्ट को बताया कि आंदोलनकारी के पथराव से सिपाही सर्वजीत कुमार, ओमप्रकाश टकाहर, सहायक अवर निरीक्षक सुधीर कुमार मेहता, सिपाही बलदेव पासवान, महिला सिपाही रिंकू देवी, अजीत कुमरी, शिखा कुमारी, महिला पुअनी मधुबाला भारती, सिपाही कमरुद्दीन, औद्योगिक थानाध्यक्ष अविनाश कुमार, महिला सिपाही पलक कुमारी, सहायक अवर निरीक्षक महेश्वरी कुमार जख्मी हुए थे. अपराधिक पुनरीक्षण की सुनवाई के बाद 24 अप्रैल 2025 को ऊपरी अदालत ने बिहार राज्य के क्रिमिनल रिवीजन को खारिज कर दिया. इस संबंध में अधिवक्ता शशिकांत उपाध्याय ने बताया कि पूरे घटनाक्रम को लेकर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में परिवाद पत्र दाखिल किया गया था जिसे न्यायालय द्वारा ग्रहण करने के बाद विपक्षियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया है.

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Published by: Amlesh prasad

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