Buxar News : आत्मा के बैनर तले सोमवार को संयुक्त कृषि भवन स्थित सभागार में प्राकृतिक खेती को लेकर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार, आत्मा के उपनिदेशक रणधीर कुमार तथा अनुमंडल कृषि पदाधिकारी शामिलग्राम सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यशाला में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व, इसके लाभ और रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों के कम इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी गई.
मिट्टी की सेहत के लिए प्राकृतिक खेती जरूरी
किसानों को संबोधित करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाना वर्तमान समय की आवश्यकता है. किसानों को अपने साथ-साथ आने वाली पीढ़ी के लिए भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहिए. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और खेती की लागत को भी कम किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती शुरू करने के शुरुआती दौर में उपज कुछ कम हो सकती है, लेकिन लंबे समय में इससे मिट्टी की सेहत बेहतर होती है. साथ ही फसलों में रोग और कीट का प्रकोप भी कम होता है.
रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग कम करने पर जोर
अधिकारियों ने किसानों से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की अपील की. खेती में जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर देते हुए बताया गया कि इससे जमीन की गुणवत्ता को लंबे समय तक बरकरार रखा जा सकता है. प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम करने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.
जीवामृत और बीजामृत बनाने की दी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने जीवामृत, बीजामृत और जैविक खाद तैयार करने की विधि के साथ फसल प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के बारे में भी प्रशिक्षित किया गया.
योजनाओं और अनुदान का लाभ लेने की अपील
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रशिक्षण के साथ विभिन्न योजनाओं और अनुदान का लाभ भी उपलब्ध कराया जाता है. किसानों से विभागीय योजनाओं की जानकारी लेकर अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई.
