Buxar News: राजनीति के संत थे लालमुनी चौबे : राज्यपाल

Buxar News: भारतीय राजनीति का स्व. लालमुनी चौबे संत भी कहे जाते हैं. उनके नाम में मुनी लगा हुआ है.

बक्सर

. भारतीय राजनीति का स्व. लालमुनी चौबे संत भी कहे जाते हैं. उनके नाम में मुनी लगा हुआ है. वहीं ढेर सारे लोग उन्हें बाबा कहा करते थे. वे राजनीति के योगिराज थे. योगीराज वही कहा जा सकता है जिसमें दूसरे को मुनी बनाने की क्षमता होती है. यही क्षमता लालमुनी चौबे में थी.

उन्होंने कई संतों को स्थापित किया. जो देश में लोगों की सेवाओं में अपनी भूमिका निभाया. राजनीति में बाबा पहले ऐसा अध्यात्मिक राजनेता हैं. जिन्होंने जनता को सदैव ईश्वर माना और उनकी अराधना और सेवा की. ऐसा जगमगाता तारा किसी भी क्षेत्र, राज्य या प्रदेश को मुश्किल से मिलता है. हर एक राजनीतिज्ञ अपने दायित्व का निर्वहन करता है. उक्त बातें जम्मू एंड कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहीं. उन्होंने कहा कि चौबे जी अपने दायित्व निर्वहन में बेजोड़ थे. उन्होंने राजनीति में बड़े सिद्धांत नहीं गढ़े. उनके विपक्षी भी उनके साथ थे. उनके विचारों व रिश्तों में मतभेद नहीं था. उनका पूरा जीवन सामाजिक सेवा के प्रति समर्पित था. वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र रहे है. जब विश्वविद्यालय के हिंदू शब्द को हटाने की बात आई तो स्व. चौबे ने आंदोलन की शुरूआत की. उनकी गिरफ्तारी हुई. लोगों के हित के लिए हमेशा खड़े रहे. उनमें जीवन भर बच्चों जैसी सरलता एवं सहजता बनी रही. वे 1972 में चैनपुर से जनसंघ से चुनाव जितना टेढ़ी खीर थी. इसके बावजूद उन्होंने जीता. युवाओं को स्व. लालमुनी चौबे के जीवन से प्रेरणा लेने की बात करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में जो लोग आते है उन्हें अपनी त्याग के लिए हमेशा तैयार रहना होगा. यही बाबा के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी. स्व. लालमुनी चौबे के छात्र जीवन के काल के मित्रवत रहे मनोज सिंहा ने स्व. लालमुनी चौबे के 9वीं पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को 1:23 से 1:43 तक कार्यक्रम को संबोधित किया. इसके साथ ही उन्होंने आगे संबोधित करते हुए कहा कि विधायक बनने के दो साल बाद ही उन्होंने जेपी आंदोलन में भागीदारी निभाई. आंदोलन में भागीदारी के लिए विधानसभा की सदस्यता से चार लोगों ने अपना इस्तीफा दिया था जिसमें पहला इस्तीफा स्व. चौबे ने दिया था. इसके पूर्व करीब नगर भवन में श्रद्धांजलि सभा में दोनों अतिथी करीब एक घंटे तक ठहरे. इस दौरान बिहार के राज्यपाल मो. आरिफ खान, जम्मू एंड कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिंहा एवं बिहार प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिलीप जायसवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं स्व. चौबे को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. इसके पूर्व दोनों राज्यपाल कार्यक्रम में 12:58 में शामिल हुए एवं 12:54 में कार्यक्रम समापन के बाद रवाना हो गये. कार्यक्रम का संचालन रामकुमार सिंह एवं अध्यक्षता झूलन दूबे ने किया. वहीं श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए बिहार के राज्यपाल मो. आरिफ खान ने संबोधित करते हुए मुझे संसद में स्वर्गीय चौबे के साथ काम करने का मौका मिला. स्व. चौबे संत थे. जो राजनीति में सूचिता व पवित्रता का दूसरा नाम लालमुनी चौबे में था. उनके नाम के साथ मुनी शब्द था. उनका जीवन सादगीपूर्ण था. विचार उच्च थे. वास्तव में भारत में हमारी संस्कृति में हमारी मनीषियों ने जो कल्पना की है उसका प्रतिनिधित्व करते थे. हमारे यहां कहा गया है कि वे लोग जो सार्वजनिक जीवन में है, उनको जानकर ही सार्वजनिक जीवन में आना चाहिए कि जहां जिनकी आराधना के लिए आए हैं, उनसे कभी भी बड़ा त्याग की मांग करती है. बड़ा से बड़ा त्याग करिए. उसी त्याग के प्रति मूर्ति स्व. चौबे थे. आपका आचरण, आपकी वाणी सौम्य होनी चाहिए. लालमुनि चौबे उस दल के नहीं बल्कि दल से बाहर जाकर कार्य करते थे. उनके विचारधारा वामपंथी थी, लेकिन उनके मित्र सभी समाजवादी थे. जिस तरफ वे संसद में मेरे सीट पर आकर मेरी भाषण की प्रशंसा संसद भवन में किया करते थे, ऐसा लगता था कि मुझे कोई आशीर्वाद दे रहा है. हमारा उत्साह वर्धन कर रहा है. वहीं उन्होंने कहा कि स्व. चौबे हमेशा जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे. वह नई चीजों को जानने के लिए इच्छुक रहते थे. वहीं उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में राजनीति में जो लोग हैं उनका धर्म यह है कि उनके लिए पराया कोई नहीं है. चाहे वह अपने दल के हों, समर्थन वाले हों या विरोधी हों. उन्होंने कहा कि मैं आत्मा हूं. आत्मा अमर है. हम किसको याद करते हैं. हम उस महापुरुष को याद करते हैं जो तप, साधना के माध्यम से हमारे शरीर में विद्यमान आत्मा का पृथ्थकीकरण हो जाता है. उन्हें कोई कष्ट नहीं पहुंचा सकता. लाल मुनी चौबे ऐसे ही व्यक्तित्व के थे. जो राजनीति में सूचिता व पवित्रता का दूसरा नाम लालमुनी चौबे में था. वहीं इस दौरान मंचासीन अतिथियों में शिशिर चौबे. रामगढ़ के विधायक अशोक सिंह, राजपुर के पूर्व विधायक संतोष निराला, ओम प्रकाश भुवन, पुनीत सिंह, धर्मेंद्र पांडेय समेत अन्य शामिल रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >