Buxar News: राजस्व महाअभियान में किसी प्रकार की शिकायत मिलने पर किया जाएगा विभागीय कार्रवाई : एडीएम

जिले में चल रहे राजस्व महाअभियान के तहत जमाबंदी सुधार कार्य को लेकर लगातार शिविर का आयोजन किया जा रहा है

बक्सर

. जिले में चल रहे राजस्व महाअभियान के तहत जमाबंदी सुधार कार्य को लेकर लगातार शिविर का आयोजन किया जा रहा है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है कि ऑनलाइन जमाबंदी में नाम या रकबा संबंधी त्रुटियों को दूर किया जाए और जिन किसानों की जमाबंदी अभी तक ऑनलाइन नहीं हुई है, उसे चढ़ाया जाए. साथ ही रैयतों की जमीन संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सकें.जिले के सभी प्रखंडों और पंचायतों में यह अभियान 16 अगस्त से शुरू हुआ है और 21 अगस्त से शिविर के माध्यम से जनता को इसका लाभ दिया जा रहा है.

शुक्रवार को सदर प्रखंड अंतर्गत जासो पंचायत और खुटहा पंचायत के दुधारचक गांव में शिविर लगाया गया.शिविर में काफी की संख्या में रैयत पहुंचे और अपनी-अपनी समस्याओं को लेकर आवेदन दिया.आंकड़ों की बात करें तो जिले के कुल 1143 मौजों में अब तक 888 मौजों की जमाबंदी का वितरण किया जा चुका है.वहीं, मात्र दो दिन के शिविर के आयोजन में ही 367 आवेदन जमाबंदी सुधार से संबंधित प्राप्त हुए हैं. जो यह स्पष्ट करता है कि बड़ी संख्या में रैयत अपनी जमीन से जुड़े मामलों में समाधान की उम्मीद लेकर शिविरों में पहुंच रहे हैं. शिविर के व्यवस्था पर रैयतों पर जाहिर किया नाराजगीहालांकि, शिविर में व्यवस्था को लेकर रैयतों में काफी नाराजगी भी देखने को मिली.विभागीय गाइडलाइन के अनुसार शिविरों में वाई-फाई की सुविधा, पुलिस बल की उपस्थिति, पीने योग्य पानी, बैठने के लिए कुर्सियां तथा हेल्प डेस्क काउंटर की व्यवस्था होनी चाहिए थी.लेकिन दुधारचक शिविर में इनमें से अधिकांश व्यवस्था नदारद रही.न तो पुलिस प्रशासन की मौजूदगी थी और न ही हेल्प डेस्क काउंटर बनाया गया था.पीने योग्य पानी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी.परिणामस्वरूप रैयत भटकते रहे और कई बार आपस में बहस व विवाद की स्थिति भी बनी. इसी बीच जब शिविर का निरीक्षण करने सीओ प्रशांत शांडिल्य मौके पर पहुंचे तो बड़ी संख्या में रैयतों ने उन्हें घेर लिया और अपनी-अपनी समस्या सामने रखी.यदि शिविर में पूछताछ काउंटर बना दिया गया होता तो रैयतों को इस तरह भटकना और परेशान नहीं होना पड़ता.कई लोगों ने बताया कि सुबह से वे अपनी बारी के इंतजार में इधर-उधर घूम रहे हैं, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिल रही.शिविर में आए रैयत सुभाष कुमार, बबलू कुमार और मुकेश कुमार ने कहा कि अगर हेल्प डेस्क काउंटर की व्यवस्था रहती तो उन्हें बार-बार भटकना नहीं पड़ता.राजस्व कर्मचारियों से जब वे जानकारी लेने पहुंचे तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला.कई बार कर्मचारियों ने सिर्फ टाल-मटोल का रवैया अपनाया.इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ी. बावजूद इसके, शिविर में आवेदन जमा करने और जमाबंदी सुधार का काम चलता रहा.रैयतों ने अपने नाम सुधार, रकबा सुधार और अन्य गड़बड़ियों को लेकर आवेदन दिए.महाअभियान का मकसद यह है कि लोगों को प्रखंड या जिला मुख्यालय तक न भटकना पड़े बल्कि उनके पंचायत स्तर पर ही उनकी समस्या का समाधान हो सकें.

बोले अधिकारीप्रभात खबर से बात करते एडीएम अरुण कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा कि अगर महाअभियान के दौरान किसी प्रकार की शिकायत मिलती है तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी.अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले ही निर्देश दिया गया है कि शिविर में आने वाले प्रत्येक रैयत को मूलभूत सुविधाएं दी जाएं.किसी भी हाल में रैयतों को परेशान न होने दिया जाए. जिले में चल रहा यह अभियान जिले के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.जिले के 1143 मौजों में से लगभग 888 मौजों में जमाबंदी वितरण का कार्य पूरा हो चुका है, यानी लगभग 78 प्रतिशत कार्य संपन्न हो चुका है.शेष मौजों में भी कार्य तेज़ी से जारी है.बड़ी संख्या में रैयतों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि लोग इस अभियान से उम्मीद लगाए हुए हैं.

क्या किया जा रहा है शिविर मेंविभागीय स्तर से मिली जानकारी के अनुसार, महाअभियान में न केवल ऑनलाइन जमाबंदी से संबंधित त्रुटियों को सुधारा जा रहा है, बल्कि जिनके नाम अब तक रजिस्टर में नहीं चढ़ पाए हैं, उन्हें भी शामिल किया जा रहा है.यह कार्य रैयतों के लिए न केवल कानूनी रूप से सुरक्षा प्रदान करेगा बल्कि भविष्य में होने वाले विवादों से भी बचाएगा.

हालांकि, जिस तरह से शिविरों में व्यवस्थागत लापरवाही देखने को मिल रही है, वह विभाग के लिए चिंता का विषय है.दुधारचक जैसे शिविर में पानी, कुर्सी और हेल्प डेस्क जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव यह दर्शाता है कि निचले स्तर के कर्मचारी अपने दायित्वों का सही निर्वहन नहीं कर रहे.ऐसे में रैयतों की परेशानी बढ़ना स्वाभाविक है. रैयतों की यही मांग है कि शिविरों में गाइडलाइन के अनुरूप सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि वे बिना भटके अपना आवेदन दे सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.विभाग यदि इस ओर गंभीरता से कदम उठाता है तो न केवल रैयतों का विश्वास बढ़ेगा बल्कि महाअभियान अपने वास्तविक उद्देश्य को भी सफल कर पाएगा.

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