Buxar News: श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही बक्सर के प्रसिद्ध रामरेखा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है. ऐसे में घाट पर बड़ी संख्या में लगाई गई चौकियों को लेकर अव्यवस्था की आशंका गहरा गई है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंडा समाज द्वारा गंगा तट के बड़े हिस्से में चौकियां स्थापित कर दिए जाने से स्नान और गंगाजल भरने की जगह काफी कम हो गई है. इससे श्रावण के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
चौकियों से सिमटा गंगा घाट का दायरा
श्रावण में प्रतिदिन हजारों कांवरिया और श्रद्धालु रामरेखा घाट पहुंचते हैं. यहां स्नान करने और गंगाजल भरने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचने से धक्का-मुक्की और अव्यवस्था की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है. श्रद्धालुओं का कहना है कि गंगा तट तक पहुंचने में भी कठिनाई हो रही है, जिससे विशेषकर बाहर से आने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ सकती है.
घाट तक का रास्ता साफ, लेकिन घाट पर जगह की कमी
मुख्य सड़क से रामरेखा घाट तक जाने वाले मार्ग को जिला प्रशासन और नगर परिषद ने अतिक्रमण मुक्त करा दिया है, जिससे श्रद्धालुओं के आने-जाने में सहूलियत हुई है. हालांकि घाट पर चौकियों के कारण स्नान और जल भरने का क्षेत्र काफी सिमट गया है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती घाट पर पर्याप्त जगह की कमी बन गई है.
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
घाट के बड़े हिस्से पर चौकियां लगाए जाने के बावजूद जिला प्रशासन और नगर परिषद की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. न तो चौकियों को हटाने की पहल हुई है और न ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था घोषित की गई है. इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है.
श्रावण में उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की भीड़
रामरेखा घाट बक्सर की प्रमुख धार्मिक आस्था का केंद्र है. श्रावण महीने में बिहार और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से श्रद्धालु यहां गंगास्नान और जल भरने के लिए पहुंचते हैं. इसके बाद श्रद्धालु मिनी बाबा धाम के नाम से प्रसिद्ध ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने जाते हैं. हर रविवार को यहां भारी भीड़ उमड़ती है. ऐसे में यदि समय रहते घाट को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
नगर परिषद के ईओ से नहीं हो सका संपर्क
इस संबंध में नगर परिषद, बक्सर के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका. ऐसे में इस मुद्दे पर नगर परिषद का पक्ष सामने नहीं आ पाया.
