Buxar News:(संतोष कांत) बक्सर जिले के नैनीजोर क्षेत्र में एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के नियमों और जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों के बाद भी सफेद बालू का अवैध खनन और परिवहन चरम पर है. उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा को जोड़ने वाले सामरिक और स्थानीय महत्व के नैनीजोर पीपा पुल माफियाओं के लिए ‘सुरक्षित कॉरिडोर’ बन गया है. हर दिन सुबह से लेकर देर रात तक सफेद बालू से लदे सैकड़ों ओवरलोडेड ट्रैक्टर और ट्रक इस पीपा पुल से होकर गुजर रहे हैं. नैनीजोर पीपा पुल का निर्माण इलाके के हजारों ग्रामीणों की सहूलियत और दोनों राज्यों के बीच संपर्क को सुगम बनाने के लिए किया गया था. इस पुल की एक निश्चित भार क्षमता (लोड कैपेसिटी) है.
माफियाओं का सिंडिकेट : रेत के खेल में ‘सफेदपोशों’ का हाथ
स्थानीय सूत्रों ने बताया कि इस पूरे खेल के पीछे एक सुनियोजित सिंडिकेट काम कर रहा है. उत्तर प्रदेश के तटीय इलाकों और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों से नदी का सीना चीरकर सफेद बालू निकाला जा रहा है. नियमानुसार बालू परिवहन के लिए वैध माइनिंग चालान (इ-चालान) अनिवार्य है, लेकिन यहाँ चलने वाले 90 प्रतिशत वाहनों के पास कोई वैध कागजात नहीं होते हैं.
विशेषज्ञों की चेतावनी – भारी वाहनों से टूट सकता है पुल
बालू से लदे गीले और ओवरलोडेड ट्रैक्टरों का वजन तय सीमा से तीन गुना अधिक होता है. पीपा पुल पर लगातार इस तरह के भारी वाहनों के दौड़ने से इसके नट-बोल्ट ढीले हो रहे हैं और ड्रमों (पीपों) में लीकेज का खतरा बढ़ गया है.यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो बाढ़ या तेज बहाव के समय यह पुल बीच से टूट सकता है, जिससे बड़ा हादसा होना तय है.
अधिकारियों का रटा-रटाया बयान
वहीं, परिवहन विभाग के अधिकारी रटा-रटाया बयान देते हैं. अवैध बालू खनन और परिवहन के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है. समय-समय पर छापेमारी की जाती है. नैनीजोर पीपा पुल के पास जल्द ही एक विशेष टीम भेजी जायेगी और जो भी वाहन अवैध रूप से बालू ले जाते पकड़े जायेंगे, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की होगी.
