Buxar News:(विनीत कुमार मिश्र) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के उप महानिदेशक, फसल विज्ञान द्वारा वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय, डुमरांव में “कशेरुकी नाशीजीव प्रबंधन पर अखिल भारतीय तंत्र परियोजना स्वैच्छिक केंद्र” की स्वीकृति प्रदान की गई है. यह बिहार राज्य का पहला कशेरुकी नाशीजीव प्रबंधन स्वैच्छिक केंद्र होगा.
यह पहल बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह के निर्देशन एवं अनुसंधान निदेशक डॉ. ए.के. सिंह के मार्गदर्शन में प्रस्तावित की गई थी. वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय, डुमरांव के प्राचार्य डॉ. पारस नाथ के संरक्षण में महाविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक-सह-कनीय वैज्ञानिक डॉ. सुदय प्रसाद एवं उनकी टीम द्वारा यह प्रस्ताव तैयार कर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को भेजा गया था.
नीलगाय और अन्य जीवों से फसल बचाव पर होगा विशेष शोध
इस परियोजना की स्वीकृति मिलने से बिहार में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कृतंक यानी चूहा एवं अन्य कशेरुकी जीवों के प्रभावी प्रबंधन पर अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी विकास को नई दिशा मिलेगी. विशेष रूप से नीलगाय से होने वाले फसल नुकसान को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन और समाधान विकसित किए जाएंगे.
किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक तकनीक का लाभ
महाविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. अभिनव कुमार सिंह ने बताया कि इस परियोजना के माध्यम से फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कृतंक एवं अन्य जीवों के नियंत्रण पर प्रभावी कार्य किया जाएगा. इससे किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए फसल सुरक्षा, भंडारित अनाज संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी.
कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि
विश्वविद्यालय प्रशासन एवं महाविद्यालय परिवार ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे बिहार के कृषि अनुसंधान, कृषि शिक्षा और किसानों के हित में ऐतिहासिक कदम बताया है.
Also Read : मांझा में दहेज हत्या कांड में बड़ी कार्रवाई, नामजद आरोपी मिथलेश यादव गिरफ्तार
