Buxar News(विनोद कुमार सिंह): बक्सर के चौसा में निर्माणाधीन 1320 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट तक रेलवे लाइन बिछाने का कार्य बुधवार को किसानों के विरोध के बाद रोक दिया गया. किसानों का आरोप है कि बेचनपुरवा के साइफन और बालाबान इलाकों में बिना पूर्व सूचना और संयुक्त सर्वे के ही खेतों में मापी और पिलरिंग का काम शुरू कर दिया गया था.
बिना संयुक्त सर्वे के पिलर लगाना नियमों के खिलाफ
सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में किसान मौके पर पहुंचे और काम रुकवा दिया. स्थानीय किसान अंशु चौबे ने कहा कि कंपनी के प्रतिनिधि और ठेकेदार सीमांकन कर रहे थे, जबकि अब तक किसानों से कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है. न जमीन की विधिवत मापी हुई है और न संयुक्त सर्वे कराया गया. ऐसे में रेलवे अलाइनमेंट तय कर पिलर लगाना नियमों के खिलाफ है.
किसानों ने दी चेतावनी
किसानों ने आरोप लगाया कि कंपनी और ठेकेदार लगातार नियम-कानूनों को नजरअंदाज कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन भी कंपनी का सहयोग कर रहा है, जिससे नाराजगी बढ़ रही है. किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक उचित मुआवजा, वार्ता और सहमति की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, कोई काम नहीं होने देंगे.
विरोध के बाद काम रोक दिया गया
बता दें कि, चौसा में 660-660 मेगावाट की दो यूनिट वाला थर्मल प्लांट बन रहा है. पहली यूनिट चालू हो चुकी है और दूसरी को जल्द शुरू करने के लिए काम तेज है. फिलहाल कोयला ट्रकों से लाया जा रहा है, लेकिन स्थायी व्यवस्था के तहत सीधे प्लांट तक रेल लाइन बिछाने की योजना है. इसी के तहत हो रही पिलरिंग का किसानों ने विरोध किया. किसानों ने कहा कि बिना बातचीत के जबरन काम कराने की कोशिश हुई तो बड़ा आंदोलन होगा. फिलहाल विरोध के बाद काम रोक दिया गया है.
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