Buxar News (प्रशांत कुमार राय):
बक्सर जिले में आंगनबाड़ी व्यवस्था की स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है. जिले में कुल 1944 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 1871 केंद्र ही संचालित हो रहे हैं. इनमें भी 1209 केंद्र आज तक अपने भवन के अभाव में किराए के भवनों में चलाए जा रहे हैं. स्थिति यह है कि अधिकांश जगहों पर किराए पर लिए गए भवनों के बजाय सेविका या सहायिका के निजी घरों में ही केंद्र का संचालन किया जा रहा है.
बदहाल व्यवस्था विभागीय दावों की पोल खोल रही
ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषण एवं प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित होने वाले इन केंद्रों की बदहाल व्यवस्था विभागीय दावों की पोल खोल रही है. कई स्थानों पर केंद्रों में न तो पर्याप्त जगह है और न ही बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था. ऐसे में सरकार की योजनाओं का लाभ लाभुकों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है.
जमीनी हकीकत अलग
आईसीडीएस विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 1871 केंद्र नियमित रूप से संचालित होने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है. कई केंद्रों में सेविका और सहायिका के पद खाली हैं. विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में सेविका के 139 पद रिक्त हैं, जबकि सहायिका के 369 पद खाली पड़े हुए हैं. सवाल यह उठ रहा है कि बिना सेविका और सहायिका के आखिर इन केंद्रों का संचालन कैसे हो रहा है.
कुछ केंद्र सिर्फ कागजों पर
विभागीय सूत्रों की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में किराए के भवन में संचालित केंद्रों के लिए प्रति माह दो हजार रुपये तथा शहरी क्षेत्रों में छह हजार रुपये तक किराया दिया जाता है. इसके बावजूद कई जगहों पर निर्धारित भवन में केंद्र संचालित नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ केंद्र सिर्फ कागजों पर ही चल रहे हैं, जबकि वास्तविक संचालन कहीं और किया जाता है.
15 वर्षों बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं
सबसे गंभीर बात यह है कि जिले में 27 आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं जिनके भवन निर्माण का कार्य वर्ष 2011 में ही 13वीं वित्त योजना के तहत शुरू किया गया था. लेकिन 15 वर्षों बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है. कहीं प्लास्टर अधूरा है तो कहीं छत और फर्श का काम बाकी है. भवन निर्माण पूरा नहीं होने के कारण ये केंद्र आज भी किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर भवन निर्माण पूरा कर लिया जाता तो बच्चों को बेहतर सुविधा मिल पाती.
विभागीय बैठक में निर्देश
मंगलवार को विभागीय बैठक में यह निर्देश दिया गया कि जो भवन 13वीं वित्त से बनाया जा रहा है और जिसमें कुछ काम बाकी है, उन सभी भवनों को विभिन्न कंपनी के सीएसआर फंड से पूरा किया जाएगा.
किस प्रखंड में कितने केंद्र संचालित हैं और कितने किराए के भवन में चल रहे हैं तथा कितने में सेविका/सहायिका नहीं है:
| प्रखंड | संचालित | किराए के भवन | सेविका/सहायिका रिक्त |
| बक्सर | 275 | 175 | 82 |
| राजपुर | 233 | 83 | 69 |
| चौसा | 122 | 80 | 24 |
| इटाढ़ी | 192 | 100 | 48 |
| डुमरांव | 228 | 174 | 44 |
| सिमरी | 258 | 208 | 82 |
| चक्की | 48 | 31 | 21 |
| ब्रह्मपुर | 228 | 163 | 49 |
| चौगाई+केसठ | 93 | 71 | 49 |
| नावानगर | 194 | 124 | 49 |
कितना 13वीं वित्त से कार्य शुरू हुआ और अब तक अधूरा है:
प्रखंड | संख्या
बक्सर | 5
नावानगर | 4
इटाढ़ी | 4
ब्रह्मपुर | 3
चौगाई | 1
केसठ | 2
सिमरी | 3
चक्की | 2
डुमरांव | 1
चौसा | 1
जिला पंचायत राज पदाधिकारी सचिन कुमार ने कहा कि जो 27 आंगनबाड़ी केंद्र का भवन निर्माण कार्य 13वीं वित्त से कराया जा रहा था, लेकिन क्यों पूरा नहीं हुआ, इसकी जांच कराते हुए काम पूरा कराया जाएगा.
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