Buxar District Council Protest : (ओंकार नाथ मिश्र) बक्सर जिला परिषद कार्यालय परिसर में पार्षदों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. सोमवार को आंदोलन के तीसरे दिन पार्षदों ने अर्धनग्न होकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. लंबे समय से अपनी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज जनप्रतिनिधियों ने यह कदम उठाया और जिला प्रशासन पर सीधा हमला बोला. प्रदर्शन के दौरान डीडीसी पर मनमानी रवैया अपनाने और जिला परिषद के कार्यों में पार्षदों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया गया.
मांगों की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश
पार्षदों का कहना है कि वे कई महीनों से अपनी समस्याओं और क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को प्रशासन के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. उनका आरोप है कि जिला परिषद की योजनाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया जा रहा है, जिससे उनकी भूमिका सिर्फ नाम मात्र की रह गई है. इससे विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं और जनता को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है.
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान पार्षदों ने कहा कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की आवाज को नजरअंदाज करना सही नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बातों, सुझावों और शिकायतों को लगातार अनसुना किया जा रहा है. इससे न सिर्फ जनप्रतिनिधियों का अपमान हो रहा है, बल्कि जनता के हित भी प्रभावित हो रहे हैं.
चरणबद्ध आंदोलन ने लिया उग्र रूप
बताया गया कि यह आंदोलन 18 जून से चरणबद्ध तरीके से चल रहा है. पहले दो दिनों तक पार्षदों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और पुतला दहन कर विरोध जताया. लेकिन जब प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो तीसरे दिन उन्हें अर्धनग्न प्रदर्शन जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ा. इससे साफ है कि पार्षदों का आक्रोश अब चरम पर पहुंच चुका है.
कई पार्षद और प्रतिनिधि रहे मौजूद
इस आंदोलन का नेतृत्व जिला परिषद सदस्य राजीव कुमार ने किया. उनके साथ पूजा देवी, धर्मेंद्र ठाकुर, सहाना खातून सहित कई अन्य पार्षद और प्रतिनिधि भी मौजूद रहे. सभी ने एक स्वर में डीडीसी के खिलाफ नारेबाजी की और तत्काल वार्ता की मांग उठाई.
प्रशासन को दी चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में यह विरोध और उग्र हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.
बक्सर में पार्षदों का यह आंदोलन अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. अर्धनग्न प्रदर्शन के बाद मामला और गंभीर हो गया है. अब देखना होगा कि प्रशासन पार्षदों की मांगों पर कितनी जल्दी और क्या कदम उठाता है, क्योंकि स्थिति को संभालना अब जरूरी हो गया है.
