Buxar News(संतोष कांत): बिहार में ग्रामीणों को उनके घर के पास ही सुलभ, त्वरित और पारदर्शी न्याय दिलाने के दावों को जमीनी स्तर पर बड़ा झटका लगा है. राज्य की ग्राम कचहरियों में मुकदमों के निष्पादन (निपटारे) की रफ्तार बेहद सुस्त है. आलम यह है कि न्याय के लिए ई-ग्राम कचहरी पोर्टल पर दर्ज कुल मामलों में से लगभग आधे (50 फीसदी) मामले आज भी लंबित पड़े हैं.
इस सुस्त कार्यप्रणाली पर पंचायती राज विभाग ने गहरा असंतोष और नाराजगी जताई है. विभाग के सचिव मनोज कुमार ने राज्य के सभी जिला पंचायत राज पदाधिकारियों को एक कड़ा पत्र जारी कर अपने-अपने क्षेत्रों में लंबित पड़े दीवानी (सिविल) और फौजदारी (आपराधिक) मामलों का समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
पोर्टल की शुरुआत के बाद भी नहीं सुधरे हालात
उल्लेखनीय है कि बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के तहत ग्राम कचहरियों को स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे आपराधिक और सिविल मामलों की सुनवाई करने तथा उन पर कानूनी फैसला सुनाने का अधिकार दिया गया था. इसी व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए वर्ष 2024 में ‘ई-ग्राम कचहरी पोर्टल’ की शुरुआत की गई थी.
मकसद यह था कि आम जनता को अपने मुकदमों की अद्यतन स्थिति जानने के लिए अदालतों या दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें. लेकिन पोर्टल शुरू होने के दो साल बाद भी केसों के निष्पादन की रफ्तार बेहद धीमी है, जिसे लेकर दैनिक समाचार पत्रों में भी लगातार चिंता जताई जा रही थी.
आंकड़ों की जुबानी: 28 हजार से अधिक मुकदमे अब भी पेंडिंग
पंचायती राज विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जमीन-जायदाद से जुड़े दीवानी मामलों की तुलना में आपसी विवाद और मारपीट से जुड़े फौजदारी मामलों के निपटारे की दर थोड़ी बेहतर है. लेकिन कुल मिलाकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है.
दीवानी (सिविल) मामले
पोर्टल पर अब तक कुल 31,112 दीवानी मामले दर्ज किए गए, जिनमें से महज 14,741 मामलों का ही निपटारा हो सका है। यानी 16,371 परिवार आज भी अपने जमीनी या पारिवारिक विवादों के सुलझने का इंतजार कर रहे हैं।
फौजदारी (आपराधिक) मामले
छोटे-मोटे अपराधों और आपसी विवादों से जुड़े कुल 26,428 मामले दर्ज हुए, जिनमें से 14,433 मामलों का निष्पादन किया गया. इसके बावजूद 11,995 मामले अब भी लंबित हैं.
कुल स्थिति
राज्यभर में अब तक कुल 57,540 मामले ई-ग्राम कचहरी के दायरे में आए, जिनमें से सिर्फ 29,174 (लगभग 50.6 प्रतिशत) मामलों का ही निपटारा हो पाया है.
जिलाधिकारियों को भी किया गया अलर्ट, होगी समीक्षा
पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने अपने आदेश में साफ कहा है कि प्रिंट मीडिया और अन्य माध्यमों से लगातार यह सूचना मिल रही है कि ग्राम कचहरियों में केस निपटारे की रफ्तार बेहद सुस्त है. यह स्थिति सरकार की मंशा के विपरीत है.
सचिव का सख्त निर्देश
सभी जिला पंचायत राज पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों के अंतर्गत आने वाली ग्राम कचहरियों के कामकाज की तुरंत समीक्षा करें. साथ ही पोर्टल पर दर्ज सभी लंबित मुकदमों का समयबद्ध तरीके से शत-प्रतिशत निष्पादन सुनिश्चित कराया जाए.
शासन स्तर पर इस मामले को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस आदेश की प्रतिलिपि राज्य के सभी जिलाधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई और निगरानी के लिए भेजी गई है, ताकि वे अपने स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग कर सकें. अब देखना यह होगा कि सरकार की इस सख्ती के बाद ग्रामीण इलाकों में पेंडिंग पड़े इन हजारों मामलों को कितनी जल्दी न्याय मिल पाता है.
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