Buxar News: आम दिनों की अपेक्षा जिले में बढ़ी 72 मेगावाट बिजली कि खपत

शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रोंं तक इन दिनों बिजली कटौती एक सामान्य समस्या बन गयी है.

बक्सर

. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रोंं तक इन दिनों बिजली कटौती एक सामान्य समस्या बन गयी है. आम उपभोक्ता परेशान हैं. चौक-चौराहों पर 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं. जहां एक ओर सरकार की इस घोषणा को राहत के रूप में देखा गया था, वहीं दूसरी ओर अब इसे बिजली कटौती से जोड़ कर देखा जा रहा है. वही विभाग के माने तो इस वर्ष ही नहीं प्रत्येक वर्ष जुलाई से लेकर सितंबर माह तक विधुत खपत बढ़ जाता है. इस महीने में कृषि का भी कार्य होता है. साथ ही साथ मानसून आने के वजह से बारिश भी होती हैं तो किसी न किसी फिडर में फाल्ट का समस्या बना रहता है. कही कही तो अधिक लोड होने के कारण ट्रांसफार्मर भी जल रहे हैं. वही अगस्त माह में 17 जुलाई को मुख्यमंत्री के द्वारा 125 यूनिट घरेलू उपभोक्ताओं मुक्त बिजली देने की घोषणा की गई थी. यह एक अगस्त से लागू किया गया है. शहर से ग्रामीण एरिया में आम लोगों के द्वारा चर्चा का विषय बना हुआ है कि 17 जुलाई से घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुक्त बिजली देने की घोषणा सरकार जब से की है. तब से बिजली की कटौती विभाग के द्वारा शुरू कर दिया गया है. लेकिन विभाग का मानना है कि अधिक लोड होने के कारण कुछ समस्या हुआ है. ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है. वही विभागीय जानकारी के अनुसार जिले भर में मार्च माह का खपत देखा जाये तो 128 मेगावाट खपत था, लेकिन आज के समय में 200 मेगा वाट हो गया है. जिसके वजह से लोड सेडिंग की समस्या बढ़ गई है. इस संबंध में जब विद्युत विभाग के विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जुलाई माह से सितंबर माह तक कृषि कार्य होने से बिजली खपत बढ़ जाती है. जिसके वजह से लोड सेटिंग के समस्या बढ़ जाती है. प्रत्येक वर्ष इस माह में विद्युत खपत की लोड बढ़ जाती है. जिसके वजह से समस्या हो रहा है.

125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना और उपभोक्ताओं की उम्मीदेंमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 17 जुलाई 2025 को घोषणा की थी कि 1 अगस्त से राज्य के हर घरेलू उपभोक्ता को प्रति माह 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाएगी.इस योजना का उद्देश्य गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देना था.योजना लागू होते ही लोगों में उम्मीद जगी कि अब उन्हें बिजली बिल में बड़ी राहत मिलेगी.बिजली कटौती को लेकर बढ़ी चर्चाएंहालांकि, योजना लागू होने के कुछ ही दिनों बाद बिजली कटौती की समस्या ने एक बार फिर सिर उठा लिया. शहर हो या गांव, हर जगह बिजली की अनियमित आपूर्ति से लोग परेशान हैं.चौक-चौराहों पर अब चर्चा यह है कि मुफ्त बिजली की घोषणा के बाद जानबूझकर बिजली कटौती की जा रही है, जिससे सरकार को राजस्व नुकसान न हो. लेकिन इस संदर्भ में विद्युत विभाग का स्पष्ट बयान है कि ऐसी कोई योजना या साजिश नहीं है. विभाग के अनुसार, हर साल जुलाई से सितंबर तक बिजली खपत में अचानक वृद्धि हो जाती है, जिसकी वजह से लोड सेटिंग की समस्या उत्पन्न होती है. खपत में अप्रत्याशित वृद्धि, मार्च की तुलना में 72 मेगावाट अधिक खपत विभागीय आंकड़ों के अनुसार, मार्च माह में जहां कुल बिजली खपत 128 मेगावाट थी, वहीं अगस्त में यह बढ़कर 200 मेगावाट तक पहुंच गई है.यह 72 मेगावाट की वृद्धि दर्शाती है, जो एक बड़ी चुनौती बन चुकी है. इस वृद्धि के पीछे कई कारण हैं. कृषि कार्यों में सिंचाई के लिए बिजली का अधिक उपयोग, मानसून के दौरान घरों में उपकरणों की अधिक खपत, कहीं-कहीं लोड अधिक होने से ट्रांसफार्मरों का जल जाना, फीडरों में तकनीकी फॉल्ट की बढ़ती घटनाएं,बोले अधिकारीजब इस संबंध में विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता सूर्य प्रकाश सिंह ने बताया कि जुलाई से सितंबर तक हर वर्ष खपत बढ़ जाती है. खासकर कृषि कार्य, सिंचाई और बरसात के कारण फॉल्ट की संख्या बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि इसका 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने साथ ही कहा कि विभागीय सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का तत्परता से समाधान करें. यदि किसी अधिकारी द्वारा लापरवाही बरती जाती है तो उस पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी.

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