पहली सोमवारी और नाग पंचमी आज : नालंदा के शिवालयों में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़, तैयारियां पूरी

Sawan Somwari Nalanda : नाग पंचमी के साथ सावन की पहली सोमवारी आज मनाई जा रही है. नालंदा के शिवालयों में शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं.

Sawan Somwari Nalanda : भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण मास की पहली सोमवारी सोमवार को पूरे जिले में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी. पहली सोमवारी के साथ ही सावन के पांचवें दिन नाग पंचमी का पर्व भी मनाए जाने से जिले के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है.

सोमवार तड़के से ही श्रद्धालु गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, आक, दूध, दही, शहद और अन्य पूजन सामग्री के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक एवं विशेष पूजा-अर्चना करेंगे. इसे लेकर रविवार से ही मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.

स्थानीय धनेश्वर घाट मंदिर, जंगलिया बाबा मंदिर गुफा पर, नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर खंदक पर, बड़ी मंदिर गढ़पर, कचहरी चौराहा स्थित शिव मंदिर, नई सराय, रामचंद्रपुर, सोहसराय सहित शहर के अन्य शिवालयों में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के शिवालयों में भी साफ-सफाई, पेयजल, बैरिकेडिंग और पूजा व्यवस्था की गई है.

मंदिर समितियों के स्वयंसेवक भी भीड़ को व्यवस्थित करने में सहयोग करेंगे. महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है. पहली सोमवारी होने के कारण सुबह से देर रात तक पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहने की संभावना है.

सोमवारी व्रत का विशेष महत्व और धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार का दिन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है. इस संबंध में पंडित श्रीकांत शर्मा आचार्य ने बताया कि सावन की सोमवारी पर व्रत एवं विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.

विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां योग्य वर की प्राप्ति के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं.

कई श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखकर शिव मंत्रों का जाप और रुद्राभिषेक भी करेंगे. इससे श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं. उन्होंने बताया कि इसीलिए भगवान शिव को देवों के देव महादेव भी कहा जाता है.

नाग पंचमी का पर्व और घरों में पूजा की परंपरा

स्थानीय परंपरा के अनुसार सावन कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है. इस अवसर पर लोग नाग देवता की पूजा कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करेंगे. घरों और मंदिरों में दूध, धान का लावा, फूल एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाएगी.

लोग घरों में नीम की टहनियां लगाते हैं तथा उसका दातुन भी करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में भी नाग पंचमी को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है. पूजा सामग्री की खरीदारी से बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है. पहली सोमवारी और नाग पंचमी को लेकर रविवार को ही लोगों के द्वारा आवश्यक सामग्रियों की खरीदारी की जा रही है.

दोनों पर्वों की एक साथ खरीदारी से बाजारों में चहल-पहल

श्रद्धालुओं के द्वारा सोमवारी व्रत तथा नाग पंचमी दोनों पर्वों की खरीदारी रविवार को किए जाने से बाजारों में काफी चहल-पहल रही. रविवार को दिनभर श्रद्धालुओं के द्वारा पूजन सामग्री बेलपत्र, फूल-माला, अगरबत्ती, धूप, फल, आम, कटहल, धान का लावा, दूध, मिठाई तथा अन्य सामग्री की खरीदारी की गई.

खरीदारी को लेकर दुकानों से लेकर फुटपाथों तक तथा ठेलों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही. शहर के रामचंद्रपुर, पुलपर, कचहरी चौराहा, सोहसराय, नई सराय, खंदकपर, बस स्टैंड, भरावपर अन्य प्रमुख बाजारों में सड़क किनारे सजे अस्थायी ठेलों पर भी लोगों ने जमकर खरीदारी की.

व्यापारियों के अनुसार पहली सोमवारी और नाग पंचमी एक साथ होने के कारण इस बार पूजा सामग्री की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही.

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