बिहारशरीफ में 7.26 लाख के स्टैंड पोस्ट का मंत्री ने किया था उद्घाटन; साल भर बाद भी नहीं टपका एक बूंद पानी

Nalanda Water Stand Post Scam News : बिहारशरीफ के वार्ड संख्या-25 में 7.26 लाख की लागत से बने स्टैंड पोस्ट सह समरसेबल बोरिंग का तत्कालीन मंत्री जिवेश कुमार ने उद्घाटन किया था. एक साल बाद भी पानी न मिलने से जनता में भारी आक्रोश. नगर आयुक्त कुमार निशांत विवेक ने दिए जांच के आदेश. पढ़ें रिपोर्ट.

Nalanda Water Stand Post Scam News (कंचन कुमार): नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ स्मार्ट सिटी से रामचंद्रपुर बाजार समिति की करोड़ों की स्मार्ट मंडी के बंद रहने के बाद अब सरकारी राशि की बर्बादी और वीआईपी उद्घाटन के फ्लॉप शो का एक और बड़ा मामला सामने आया है. शहर के वार्ड संख्या-25 स्थित मसान के पास पिछले वर्ष लाखों रुपये के सरकारी बजट से आम जनता की प्यास बुझाने के लिए एक आधुनिक स्टैंड पोस्ट का निर्माण कराया गया था. भव्य शिलापट्ट लगाकर भारी लाव-लश्कर और मंत्री की मौजूदगी में इसका फीता भी काटा गया. लेकिन कड़वी हकीकत यह है कि इस उद्घाटन के पूरे एक साल बीत जाने के बाद भी इस स्टैंड पोस्ट से स्थानीय नागरिकों को पीने के लिए पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं हुई है.

12 जून 2025 को पूरे सरकारी तामझाम के साथ हुआ था उद्घाटन, आज कबाड़ बन रही लाखों की योजना

वार्ड संख्या-25 के स्थानीय निवासियों और विभागीय दस्तावेजों से मिली लाइव जानकारी के अनुसार, इस छोटे से स्टैंड पोस्ट पर भारी-भरकम बजट खर्च किया गया था. इस स्टैंड पोस्ट सह समरसेबल बोरिंग के निर्माण पर कुल 7 लाख 26 हजार 907 रुपये की सरकारी राशि पानी की तरह बहाई गई थी. 12 जून 2025 को तत्कालीन नगर विकास एवं आवास मंत्री जिवेश कुमार ने इसका भव्य उद्घाटन किया था. इस उद्घाटन पट्टिका पर वन एवं पर्यावरण मंत्री सह वर्तमान स्थानीय विधायक डॉ. सुनील कुमार, सांसद कौशलेंद्र कुमार और नगर महापौर अनीता देवी सहित कई दिग्गज जनप्रतिनिधियों के नाम बड़े-बड़े अक्षरों में खुदे हुए हैं. लेकिन आज इस भीषण गर्मी में भी यह पूरी संरचना केवल एक सूखा शोपीस बनकर रह गई है.

शिलापट्ट

अस्पताल, कोचिंग और पालिका बाजार के बीच मची है पानी की त्राहि-त्राहि

स्थानीय लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर सबसे ज्यादा है कि प्रशासन ने स्टैंड पोस्ट लगाने के लिए जगह तो बहुत व्यस्त चुनी, लेकिन नीयत साफ नहीं रखी. जिस मसान चौराहे पर यह स्टैंड पोस्ट खड़ा है, उसके ठीक पास कई बड़े निजी अस्पताल, जीवन ज्योति क्लीनिक, नामी स्कूल, कोचिंग संस्थान, पालिका बाजार और पार्क स्थित हैं. यहाँ हर दिन हजारों की संख्या में छात्रों, मरीजों, दुकानदारों और राहगीरों की भारी भीड़ जुटती है. पानी की कोई सरकारी व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीण इलाकों से इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों और उनके परिजनों को तपती धूप में निजी दुकानों से ₹20 की बोतलबंद पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है.

स्टैंड पोस्ट

चुनावी जल्दबाजी में ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने का आरोप

इलाके के प्रतिष्ठित नागरिक केके सिन्हा, डॉ. दिवेंद्र प्रसाद और राजीव कुमार सहित दर्जनों लोगों ने खुलेआम इस योजना में बड़े घोटाले और वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई है. मोहल्लावासियों का सीधा आरोप है कि पिछले वर्ष चुनावी माहौल का फायदा उठाने और वाहवाही लूटने के लिए जल्दबाजी में बिना पाइपलाइन और बिजली कनेक्शन की मुकम्मल जांच किए ही इस स्टैंड पोस्ट का उद्घाटन कर दिया गया. लोगों का कहना है कि इस 7.26 लाख रुपये की योजना का असली वित्तीय लाभ आम जनता को मिलने की बजाय केवल चहेते ठेकेदारों और विभाग के भ्रष्ट इंजीनियरों की जेबों में गया है. नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराकर सरकारी राशि की रिकवरी करने की मांग तेज कर दी है.

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यह तो सिर्फ एक बानगी है, कागजों पर रुपया निकालकर बंद हो जाती हैं योजनाएं; नगर आयुक्त ने संभाली कमान

स्थानीय प्रबुद्ध समाज का कहना है कि बिहारशरीफ स्मार्ट सिटी के भीतर यह कोई अकेला अनोखा मामला नहीं है. हर साल नगर निगम क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत वाली नल-जल और सौंदर्यीकरण की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन तो बड़ी हेडिंग्स के साथ होता है, लेकिन धरातल पर वे योजनाएं या तो कुछ ही हफ्तों में दम तोड़ देती हैं या कभी लाइव चालू ही नहीं होती हैं. आरोप है कि कई योजनाओं की राशि केवल फाइलों पर 100 प्रतिशत काम दिखाकर सरकारी खजाने से निकाल ली जाती है.

इस बड़े लाइव खुलासे और जनता के बढ़ते भारी आक्रोश के बाद बिहारशरीफ नगर निगम के नगर आयुक्त कुमार निशांत विवेक तुरंत एक्शन में आ गए हैं. उन्होंने ऑन-रिकॉर्ड बयान जारी करते हुए मामले को अत्यंत गंभीर और सरकारी मानकों के खिलाफ बताया है. नगर आयुक्त ने कड़े लहजे में कहा कि यदि मंत्रियों द्वारा उद्घाटन किए जाने के बाद भी स्टैंड पोस्ट से पानी की सप्लाई शुरू नहीं की गई है, तो इसकी एक विशेष तकनीकी टीम से गहन जांच कराई जाएगी. जांच रिपोर्ट आते ही यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि योजना किसी तकनीकी तकनीकी गड़बड़ी (जैसे बिजली या बोरिंग फेल होना) के कारण बंद है या इसमें जानबूझकर किसी स्तर पर भारी लापरवाही और वित्तीय हेराफेरी की गई है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो भी ठेकेदार या सरकारी बाबू इसमें दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई और रिकवरी की जाएगी. अब देखना यह है कि इस कड़े आदेश के बाद क्या नगरनौसा बाजार की तरह यहाँ भी कोई कड़ा ऐक्शन होता है या वार्ड-25 के लोग ऐसे ही प्यासे तड़पते रहते हैं.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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