बिहारशरीफ कार्यालय से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Nalanda News: नालंदा में इस बार मानसून की रफ्तार किसानों की उम्मीदों पर भारी पड़ रही है. आर्द्रा नक्षत्र का आधे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जिले के अधिकांश हिस्सों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. नतीजा यह है कि धान की बिचड़ा (नर्सरी) की बुआई और रोपनी की रफ्तार थम गई है. 20 में से 7 प्रखंडों में छह दिनों के दौरान एक बूंद भी बारिश दर्ज नहीं होने से खेत सूखे पड़े हैं और किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं.
मानसून की बेरुखी से किसान परेशान
करीब 2,355 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले नालंदा जिले में इस बार बारिश का वितरण पूरी तरह असमान बना हुआ है. कहीं हल्की और छिटपुट वर्षा हो रही है, तो कई इलाकों में काले बादल मंडराने के बाद भी बिना बरसे लौट जा रहे हैं. मानसून की इस बेरुखी का सीधा असर खरीफ खेती पर दिखने लगा है. पर्याप्त पानी नहीं मिलने से धान की बिचड़ा तैयार करने और रोपनी का काम प्रभावित हो रहा है, जबकि किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बादलों के मेहरबान होने का इंतजार कर रहे हैं.
सूखे खेतों ने बढ़ाई किसानों की बेचैनी
22 जून से 6 जुलाई तक चलने वाले आर्द्रा नक्षत्र को खरीफ खेती की शुरुआत के लिए सबसे अहम माना जाता है, लेकिन इस बार कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. 23 से 29 जून के बीच जिले के कुछ प्रखंडों में छिटपुट बारिश जरूर हुई, लेकिन इसका लाभ पूरे जिले को नहीं मिल सका. लगातार गिरते भू-जलस्तर और पर्याप्त वर्षा के अभाव में खेती की तैयारियां पिछड़ रही हैं. यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो धान की बिचड़ा बुआई के साथ-साथ रोपनी और खरीफ उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
छह दिनों में जिले में कुल 6.42 मिमी औसत वर्षापात
नालंदा जिले में 23 से 29 जून के बीच (24 जून को वर्षापात दर्ज नहीं हुआ) कुल 6.42 मिमी औसत वर्षापात दर्ज किया गया. इस अवधि में 23 जून को 0.79 मिमी, 25 जून को 1.13 मिमी, 26 जून को 0.12 मिमी, 27 जून को 0.80 मिमी, 28 जून को 1.01 मिमी तथा 29 जून को सबसे अधिक 2.57 मिमी औसत वर्षापात हुआ. 29 जून को बिहारशरीफ में 30.8 मिमी वर्षापात दर्ज होने से उस दिन जिले का औसत वर्षापात सबसे अधिक रहा. हालांकि, अधिकांश प्रखंडों में बारिश सामान्य से काफी कम रही, जिससे कृषि कार्य अब भी प्रभावित हैं.
इन प्रखंडों में सबसे अधिक हुई बारिश
छह दिनों के आंकड़ों के अनुसार हिलसा, रहुई और बिंद सबसे अधिक सक्रिय प्रखंड रहे, जहां चार-चार दिनों तक वर्षापात दर्ज किया गया. चंडी में तीन दिन तथा बिहारशरीफ, नगरनौसा, सिलाव और अस्थावां में दो-दो दिन बारिश हुई. दैनिक रिकॉर्ड के अनुसार 23 जून को नगरनौसा में 8.0 मिमी, 25 जून को हिलसा में 6.2 मिमी, 27 और 28 जून को बिंद में 5.8-5.8 मिमी तथा 29 जून को बिहारशरीफ में 30.8 मिमी वर्षापात दर्ज किया गया, जो पूरे सप्ताह का सबसे बड़ा आंकड़ा रहा.
सात प्रखंड अब भी बारिश से वंचित
जिले के एकंगरसराय, इस्लामपुर, नूरसराय, हरनौत, परवलपुर, कतरीसराय और गिरियक ऐसे सात प्रखंड रहे, जहां 23 से 29 जून के बीच एक दिन भी वर्षापात दर्ज नहीं किया गया. इन इलाकों में खेतों में नमी नहीं बनने से धान की बिचड़ा बुआई शुरू नहीं हो सकी है और किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं.
बारिश के अभाव में बढ़ी खेती की चिंता
कृषि विशेषज्ञ कुमार किशोर नंदा का कहना है कि आर्द्रा नक्षत्र के दौरान होने वाली वर्षा धान की नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे अनुकूल मानी जाती है. इस वर्ष सामान्य से कम बारिश और लगातार गिरते भू-जलस्तर के कारण सिंचाई भी किसानों के लिए महंगी साबित हो रही है. यदि अगले कुछ दिनों में व्यापक और अच्छी वर्षा नहीं हुई तो धान की बिचड़ा बुआई, रोपनी और खरीफ उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
आर्द्रा नक्षत्र का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
ग्रामीण परंपरा में आर्द्रा नक्षत्र को वर्षा ऋतु के आगमन और खेती की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इसी अवधि में धरती रजस्वला होती है और मानसून की पहली अच्छी बारिश से कृषि कार्यों की शुरुआत होती है. बेन प्रखंड के बभनियावां निवासी बुजुर्ग किसान अर्जुन प्रसाद बताते हैं कि नालंदा जिले में इस अवसर पर खीर-पूरी बनाने, कुलदेवी की पूजा करने और अच्छी वर्षा व समृद्ध फसल की कामना करने की परंपरा आज भी कायम है. कई गांवों में धान की बुआई शुरू होने पर सामूहिक भोज का आयोजन भी किया जाता है, लेकिन इस बार पर्याप्त बारिश नहीं होने से यह परंपरा भी कई स्थानों पर फीकी पड़ती नजर आ रही है.
