Nalanda E Registration : नालंदा में जमीन निबंधन में फर्जीवाड़े पर रोक लगाने और प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित व विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई पेपरलेस ई-निबंधन व्यवस्था विरोध और कथित भ्रांतियों के कारण प्रभावित हो गई है. जिला मुख्यालय स्थित निबंधन कार्यालय में मंगलवार को लगातार 15वें दिन जमीन निबंधन का काम ठप रहा.
सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन करीब 50 से 60 दस्तावेजों का निबंधन होता था, वहीं नई व्यवस्था लागू होने के बाद पिछले 15 दिनों से निबंधन की संख्या शून्य बताई जा रही है. कार्यालय में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे तथा आम लोगों की सहायता के लिए बनाया गया सहायता काउंटर भी खुला रहा, लेकिन पक्षकार निबंधन कराने के लिए नहीं पहुंचे.
विभागीय स्तर पर बताया जा रहा है कि कातिब/दस्तावेज नवीसों के विरोध और नई व्यवस्था को लेकर फैली भ्रांतियों का असर निबंधन कार्य पर पड़ा है.
3 अगस्त से लागू हुई नई डिजिटल व्यवस्था
जमीन निबंधन की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने तथा फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सरकार ने पेपरलेस ई-निबंधन व्यवस्था लागू की है. नालंदा में यह व्यवस्था 3 अगस्त से प्रभावी की गई. नई व्यवस्था में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े विक्रेता, क्रेता, पहचानकर्ता और गवाह की पहचान का डिजिटल सत्यापन किया जाता है.
आधार सत्यापन के दौरान संबंधित व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है. ओटीपी के माध्यम से पहचान की पुष्टि होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी होती है. विभाग का मानना है कि डिजिटल पहचान सत्यापन से किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करने, फर्जी पहचान के आधार पर निबंधन कराने और दस्तावेजी फर्जीवाड़े की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
कागजात नहीं मिलने की भ्रांति पर स्पष्टीकरण
नई व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ी भ्रांति यह सामने आ रही है कि ई-निबंधन के बाद जमीन का निबंधन कराने वाले पक्षकारों को कागजात नहीं मिलेगा. नए जिला अवर निबंधन पदाधिकारी मनीष कुमार ने इस धारणा को स्पष्ट रूप से गलत बताया है.
दो दिन पूर्व पदभार ग्रहण करने वाले मनीष कुमार ने कहा कि पेपरलेस ई-निबंधन का अर्थ कागजात रहित निबंधन नहीं है. निबंधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित पक्षकार को निबंधन का दस्तावेज उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने बताया कि दस्तावेज पर क्यूआर कोड भी रहेगा.
क्यूआर कोड को स्कैन कर दस्तावेज का सत्यापन किया जा सकेगा और आवश्यकता पड़ने पर उसे डाउनलोड भी किया जा सकेगा. इससे दस्तावेज की प्रामाणिकता की जांच कहीं से भी की जा सकेगी.
समय और खर्च की बचत तथा सहायता काउंटर की व्यवस्था
जिला अवर निबंधन पदाधिकारी के अनुसार पेपरलेस ई-निबंधन का उद्देश्य केवल कागज का इस्तेमाल कम करना नहीं है. इसके माध्यम से पूरी निबंधन प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर पहचान सत्यापन, रिकॉर्ड की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाना है.
आधार आधारित पहचान सत्यापन और मोबाइल ओटीपी से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि निबंधन के लिए कार्यालय पहुंचने वाला व्यक्ति वास्तव में वही है, जिसके नाम से दस्तावेज में उसकी भूमिका दर्ज है. विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था पूरी तरह लागू होने के बाद जमीन की खरीद-बिक्री में समय की बचत, प्रक्रिया में पारदर्शिता और दस्तावेजों की सुरक्षा बढ़ेगी.
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निबंधन विभाग के अनुसार नई व्यवस्था में विक्रेता, क्रेता, पहचानकर्ता और गवाह स्वयं निबंधन कार्यालय पहुंचकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत ई-निबंधन करा सकते हैं. इसके लिए कार्यालय में सहायता काउंटर भी बनाया गया है.
काउंटर पर तैनात कर्मी आम लोगों को नई प्रक्रिया की जानकारी देने और निबंधन कराने में आवश्यक सहयोग देने के लिए मौजूद हैं. अधिकारियों का कहना है कि किसी व्यक्ति को नई व्यवस्था समझने में परेशानी हो तो वह सीधे निबंधन कार्यालय पहुंचकर सहायता काउंटर से जानकारी ले सकता है.
राजस्व प्रभाव और भ्रम दूर करने की चुनौती
निबंधन कार्यालय में सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 50-60 दस्तावेजों का निबंधन होने की बात बताई जा रही है. ऐसे में 15 दिनों तक निबंधन कार्य ठप रहने से बड़ी संख्या में जमीन की खरीद-बिक्री के मामले लंबित हो गए हैं. इसका असर आम लोगों के साथ-साथ निबंधन विभाग के राजस्व संग्रह पर भी पड़ना स्वाभाविक है.
हालांकि, 15 दिनों में कितने दस्तावेज लंबित हुए और कितने राजस्व की क्षति या राजस्व संग्रह में कमी हुई, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है. पेपरलेस ई-निबंधन को लेकर फैली भ्रांतियों ने नई व्यवस्था के क्रियान्वयन को प्रभावित किया है.
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कार्यालय में व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद पक्षकारों के नहीं पहुंचने से निबंधन का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है. अब विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती आम लोगों, कातिबों और दस्तावेज नवीसों के बीच नई व्यवस्था की सही जानकारी पहुंचाना और भ्रम दूर करना है.
यदि डिजिटल निबंधन के फायदे और पूरी प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाया जाता है, तो लंबे समय से बंद निबंधन कार्य को फिर से पटरी पर लाया जा सकता है.
क्या है पेपरलेस ई-निबंधन?
- आधार से पहचान का डिजिटल सत्यापन.
- मोबाइल पर ओटीपी के माध्यम से पहचान की पुष्टि.
- क्रेता, विक्रेता, पहचानकर्ता और गवाह का डिजिटल सत्यापन.
- दस्तावेज में क्यूआर कोड की सुविधा.
- क्यूआर कोड से दस्तावेज का सत्यापन और डाउनलोड.
- रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने की व्यवस्था.
- फर्जी पहचान और दस्तावेजी फर्जीवाड़े की संभावना कम करने का प्रयास.
- निबंधन कार्यालय में सहायता काउंटर की सुविधा.
