नालंदा जिले में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण एवं प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) की स्थिति एक ओर जहां संतोषजनक है, वहीं दूसरी ओर मानव संसाधन की भारी कमी चिंता का विषय बनी हुई है.
राहत की बात यह है कि जिले के सभी 3,417 स्वीकृत आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं और एक भी केंद्र बंद नहीं है. हालांकि, विभाग में महिला पर्यवेक्षिकाओं, सेविकाओं और सहायिकाओं के कुल 699 पद रिक्त होने से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.
अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चार बाल विकास परियोजनाएं
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 20 बाल विकास परियोजना कार्यालय संचालित हैं. इनमें से 16 परियोजनाओं में नियमित पदाधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 4 परियोजनाओं का संचालन अतिरिक्त प्रभार के आधार पर किया जा रहा है. इससे संबंधित अधिकारियों पर अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारी आ गई है.
इसके अलावा, आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी स्तर पर निगरानी करने वाली महिला पर्यवेक्षिकाओं के कुल 127 स्वीकृत पदों में से केवल 67 पदों पर ही नियुक्तियां हैं, जबकि 60 पद खाली पड़े हैं. इस वजह से प्रत्येक पर्यवेक्षिका को सामान्य से अधिक केंद्रों की देखरेख करनी पड़ रही है, जिससे नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है.
सेविकाओं और सहायिकाओं के सैकड़ों पद खाली
जमीनी स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं का संचालन करने वाली आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं की भी भारी कमी है:
- सेविका: जिले में 3,211 सेविकाएं कार्यरत हैं, जबकि 206 पद अभी भी रिक्त हैं.
- सहायिका: 2,984 सहायिकाएं अपनी सेवाएं दे रही हैं, जबकि 433 पद खाली हैं.
इन रिक्तियों के कारण कई केंद्रों पर कार्यरत कर्मियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है, जिससे दैनिक कार्यों के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से मिलने वाली प्रमुख सेवाएं
इन चुनौतियों के बावजूद, आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को निम्नलिखित छह प्रमुख सेवाएं लगातार उपलब्ध कराई जा रही हैं:
- पूरक पोषाहार
- स्वास्थ्य जांच
- चिकित्सकीय परामर्श के लिए संदर्भ सेवा
- टीकाकरण
- पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा
- विद्यालय-पूर्व शिक्षा
इनके अलावा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, पोषण अभियान, टेक होम राशन (घर ले जाने योग्य राशन) वितरण, पोशाक योजना तथा अनुग्रह सहायता योजना जैसी अनेक कल्याणकारी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां हो जाती हैं, तो व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, केंद्रों की नियमित निगरानी बेहतर बनेगी और महिलाओं व बच्चों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में अधिक सुधार देखने को मिलेगा.
