Rajgir malmas mela: पर्यटक शहर राजगीर के मलमास मेला सैरात की जमीन पर अतिक्रमण का मामला इन दिनों गरमाया हुआ है. सैरात की कुल 73.03 एकड़ भूमि में करीब तीन चौथाई भूखंड पर अतिक्रमण होने का आरोप लगाया जा रहा है. खास बात यह है कि अतिक्रमण का आरोप केवल आम लोगों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी विभागों पर भी लगाया जा रहा है. सैरात भूमि पर आर्कियोलॉजी विभाग द्वारा चहारदीवारी निर्माण को लेकर नगर परिषद और पुरातत्व विभाग आमने-सामने आ गये हैं.
नगर परिषद ने जहां सैरात की भूमि पर चहारदीवारी निर्माण कराने का आरोप लगाया है, वहीं आर्कियोलॉजी विभाग ने नगर परिषद पर अपनी चहारदीवारी तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया है. आरोप-प्रत्यारोप के बीच राजगीर के अंचलाधिकारी ने चहारदीवारी निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. इससे सैरात भूमि के सीमांकन और अतिक्रमण का मामला और सुर्खियों में आ गया है.
सैरात की 73.03 एकड़ भूमि में करीब 25 एकड़ ही दिखने का दावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक सैरात की पूरी भूमि की विधिवत नापी और सीमांकन नहीं होगा, तब तक विवाद का स्थायी समाधान संभव नहीं है. युवा राजद के प्रांतीय नेता गोलू यादव, जदयू नगर अध्यक्ष आशुतोष कुमार पाण्डेय, बबलू कुमार, धर्मराज प्रसाद, रमेश कुमार पान, अनिता कुमारी गुप्ता समेत अन्य समाजसेवियों ने कहा कि मलमास मेला सैरात की 73.03 एकड़ जमीन में से धरातल पर करीब 25 एकड़ भूमि ही दिखाई देती है.
समाजसेवियों ने आरोप लगाया कि शेष भूमि पर किसी न किसी के द्वारा अतिक्रमण किया गया है. उनका कहना है कि सैरात की जमीन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण कर बड़े-बड़े व्यावसायिक भवन तक खड़े कर दिये गये हैं. इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रभावी ढंग से नहीं हो रही है.
फर्जी जमाबंदी रद्द, प्राथमिकी के बाद भी अतिक्रमण का आरोप
समाजसेवियों ने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा पहले ही कई फर्जी जमाबंदियों को रद्द किया जा चुका है. फर्जी जमाबंदी कराने के मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज है. नगर परिषद की ओर से होल्डिंग टैक्स की चोरी करने वालों के खिलाफ सर्टिफिकेट केस किये जाने की बात कही जा रही है.
इसके बावजूद अतिक्रमण की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं दिख रहा है. समाजसेवियों ने आरोप लगाया कि नगर परिषद अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है. सैरात की जमीन को लेकर लगातार विवाद बढ़ने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस पहल नहीं की जा रही है.
16 सितंबर को दोनों पक्ष दस्तावेज के साथ होंगे आमने-सामने
अंचलाधिकारी कौशल्या कुमारी ने कहा कि नगर परिषद और आर्कियोलॉजी विभाग दोनों को 16 सितंबर को अपने-अपने दावा प्रस्तुत करने के लिए सैरात स्थल पर ही बुलाया गया है. दोनों पक्षों से चौहद्दी के साथ दस्तावेज मांगे गये हैं.
उन्होंने कहा कि दस्तावेज एवं चौहद्दी के आधार पर मापी कर दोनों की जमीन अलग-अलग कर दी जायेगी. इससे सैरात भूमि से जुड़े विवाद में जमीन के वास्तविक सीमांकन की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है.
संयुक्त नापी और सीमांकन की मांग
समाजसेवियों ने जिला प्रशासन, अनुमंडल प्रशासन और नगर परिषद से मलमास मेला सैरात की पूरी 73.03 एकड़ भूमि की संयुक्त नापी, सीमांकन और अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है. साथ ही अतिक्रमण की पुष्टि होने पर सरकारी भूमि को तत्काल अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग की गयी है.
उन्होंने कहा कि मलमास मेला राजगीर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा है. इसकी सैरात भूमि को अतिक्रमण से बचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए.
