हिलसा (नालंदा): शहर के डाकबंगला स्थित पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार देर शाम वृंदावन धाम के कृष्णा जी महाराज ने भगवान कृष्ण के ब्रज छोड़ने का प्रसंग सुनाया. कथा के दौरान उन्होंने निस्वार्थ प्रेम के महत्व को विस्तार से समझाया.
कृष्णा जी महाराज ने कहा कि कन्हैया को ब्रजवासी छोड़ना नहीं चाहते थे. माता यशोदा और नंद बाबा का कृष्ण के प्रति पुत्रवत स्नेह था, जबकि ब्रजवासियों का प्रेम निस्वार्थ था. उन्हें भगवान कृष्ण से किसी प्रकार की कामना नहीं थी. वे केवल कृष्ण की मनमोहक छवि के दर्शन करना चाहते थे.
कृष्ण के मथुरा जाने पर भावुक हुए ब्रजवासी
उन्होंने कथा प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब कृष्ण का रथ धूल के गुबार के बीच मथुरा की ओर बढ़ रहा था, तब ब्रजवासी तब तक उसके पीछे दौड़ते रहे, जब तक कन्हैया उनकी आंखों से ओझल नहीं हो गए. इसके बाद भी वे हर क्षण मन की आंखों से कृष्ण का दर्शन करते रहे.
कृष्णा जी महाराज ने कहा कि जीवन में ज्ञान और शिक्षा के साथ माता-पिता, गुरु और बड़े-बुजुर्गों की सेवा का भी विशेष महत्व है. सभी को उनका आशीर्वाद लेते रहना चाहिए.
रुक्मिणी-कृष्ण की झांकी ने मोहा मन
कथा के दौरान कृष्ण विवाह का प्रसंग भी सुनाया गया. उन्होंने कहा कि बच्चों को विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषय पर माता-पिता की इच्छा और सहमति का सम्मान करना चाहिए.
इस दौरान रुक्मिणी-कृष्ण की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गयी. श्रद्धालुओं ने झांकी के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया और भक्तिमय वातावरण में आनंदित हुए. श्रीमद्भागवत कथा को लेकर पूरे नगर में भक्ति का माहौल बना हुआ है. कथा स्थल के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी लोग आध्यात्मिक चर्चा में जुटे हैं.
