Biharsharif Nagar Nigam Strike : बिहार में चल रहे नगर निगम कर्मियों की हड़ताल ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है. पांच दिनों से राजधानी पटना समेत कई जिलों में हर तरफ कचरा ही कचरा नजर आ रहा है. बिहारशरीफ में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है, जहां लगातार चौथे दिन भी सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप रही. सड़कों से लेकर गलियों तक कचरे के ढेर लग गए हैं, जिससे लोगों का जीना मुश्किल हो गया है.
हर दिन बढ़ रहा कचरे का बोझ
जानकारी के मुताबिक बिहारशरीफ शहर में रोजाना करीब 250 टन कचरा निकलता है, लेकिन हड़ताल के कारण उसका उठाव नहीं हो पा रहा है. पिछले चार दिनों में करीब 1000 टन कचरा शहर के अलग-अलग हिस्सों में जमा हो चुका है. इससे पूरे इलाके में बदबू फैल रही है और बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है.
चितली खंदक, माली टोला रोड, खंदकपार चौराहा, हनुमान मंदिर के पास, वंदना सिनेमा रोड, कब्रिस्तान गंज, धनेश्वर घाट, कांग्रेस कार्यालय के आसपास और भैंसासुर टेलीफोन एक्सचेंज जैसे इलाकों में कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हैं. कई जगहों पर नालियां जाम हो गई हैं, जिससे बारिश का पानी सड़कों पर भर रहा है.
प्रशासन की कोशिशें नाकाफी
30 जुलाई से प्रशासन की ओर से सफाई अभियान चलाकर कई जगहों पर कचरा हटाने की कोशिश की गई थी. साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कर्मियों की तैनाती की बात भी कही गई थी. लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है. हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं और लोगों को कोई खास राहत नहीं मिल पाई है.
प्रशासन ने पहले चेतावनी भी दी थी कि सफाई व्यवस्था में बाधा डालने वालों पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इसका भी कोई खास असर नहीं दिखा है. शहर की सफाई व्यवस्था अब भी पूरी तरह चरमराई हुई है.
कर्मियों का अडिग रुख
नगर निगम कर्मियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी. कर्मचारियों ने साफ कहा है कि वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं और आंदोलन जारी रखेंगे.
आम जनता परेशान
इधर, शहरवासियों की परेशानी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. लोगों का कहना है कि गंदगी और बदबू के बीच रहना मुश्किल हो गया है. बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ने लगा है.
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और सरकार से जल्द से जल्द समाधान निकालने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर जल्द सफाई व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो हालात और भयावह हो सकते हैं.
नगर निगम की हड़ताल और प्रशासन के बीच जारी खींचतान का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. अब देखना होगा कि सरकार और कर्मचारी कब तक इस गतिरोध को खत्म कर पाते हैं और शहर को इस गंदगी से राहत मिलती है.
