Police Recruitment Bihar : बिहार में पुलिस बल को मजबूत करने की दिशा में तेजी से हो रही नियुक्तियों के बीच राजगीर के बिहार पुलिस अकादमी की जिम्मेदारी भी लगातार बढ़ती जा रही है. अकादमी के 18वें स्थापना दिवस समारोह में मंगलवार को डीजीपी विनय कुमार ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को प्रशिक्षण देने की चुनौती अकादमी के सामने होगी.
उन्होंने अकादमी को बिहार पुलिस बल का 'बैक बोन' बताते हुए प्रशिक्षण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया. स्थापना दिवस समारोह में मार्च पास्ट के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई. डीजीपी ने परेड का निरीक्षण किया.
गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और नई नियुक्तियों की रूपरेखा
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पुलिस बल की संख्या बढ़ाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देना है.
पुलिसकर्मी केवल कानून लागू करने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि 24 घंटे जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए तैयार रहने वाला कर्मी है. इसलिए प्रशिक्षण में अनुशासन, व्यवहार, कानून की समझ, निर्णय क्षमता और जनसेवा की भावना को समान महत्व दिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1799 सब-इंस्पेक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी हुई है. इसके बाद इन अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए अकादमी में लाया जाएगा. वहीं, बीपीएससी के माध्यम से करीब 130 पुलिस उपाधीक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है.
पहली बार 100 से अधिक डीएसपी का प्रशिक्षण बिहार पुलिस अकादमी में होने की संभावना है. इसके अतिरिक्त, आने वाले समय में करीब 10 हजार और पुलिसकर्मियों की बहाली की जाएगी. इससे अकादमी पर प्रशिक्षण का बड़ा दायित्व आने वाला है.
कांस्टेबल प्रशिक्षण और पुलिसकर्मियों का अनुशासन
डीजीपी विनय कुमार ने पुलिस कांस्टेबल प्रशिक्षण को लेकर किए गए नए प्रयोग का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि पहली बार पीसी प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था की गई है. सीटीएस नाथनगर और बिहार पुलिस अकादमी में करीब तीन हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
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उनका प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जिलों में योगदान कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि पुलिस कांस्टेबल से भी पदाधिकारी स्तर के अनुरूप जिम्मेदारी और दक्षता की अपेक्षा रहती है. इसलिए उनके प्रशिक्षण की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने नॉर्थ ईस्ट पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने गए बिहार के पुलिसकर्मियों के अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के पुलिसकर्मी राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण संस्थानों में भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं.
भविष्य में अकादमी की प्रशिक्षण क्षमता उपलब्ध रहने पर पीसी प्रशिक्षण का और विस्तार किया जा सकता है.
ऐतिहासिक विकास, चुनौतियां और अतिथियों की उपस्थिति
अपने संबोधन में डीजीपी ने पुलिस प्रशिक्षण के ऐतिहासिक विकास का भी उल्लेख किया. 1861 के पुलिस अधिनियम से लेकर बिहार-झारखंड विभाजन के बाद उत्पन्न प्रशिक्षण संबंधी चुनौतियों और अकादमी के विकास की यात्रा को उन्होंने सामने रखा.
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का अपना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में परिस्थितियां हमेशा चुनौतीपूर्ण होती हैं. ऐसे में प्रशिक्षण ही वह आधार है, जो पुलिसकर्मी को कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने के लिए तैयार करता है.
उन्होंने पुलिसकर्मियों से अनावश्यक अहंकार से दूर रहकर विनम्रता, अनुशासन और समर्पण के साथ जनसेवा करने की अपील की. विनय कुमार ने कहा कि सरकार पुलिस बल को आवश्यक सुविधाएं, संसाधन और प्रिविलेज उपलब्ध करा रही है. इसके बदले पुलिसकर्मियों का कर्तव्य है कि वे पूरी निष्ठा से जनता के विश्वास पर खरा उतरें.
स्थापना दिवस समारोह में अकादमी की अब तक की यात्रा के साथ उसके सामने खड़ी नई जिम्मेदारियों को भी रेखांकित किया गया. निदेशक एडीजी आर. मलार विजी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए अकादमी की उपलब्धियों को रेखांकित किया.
इस अवसर पर उप निदेशक सह प्राचार्य डीआईजी अभय कुमार लाल, सहायक निदेशक (प्रशिक्षण) अम्बरीष राहुल, सहायक निदेशक (प्रशासन) लालबाबू यादव समेत पुलिस विभाग के कई वरीय पदाधिकारी मौजूद रहे.
