नालंदा जिले में 32वीं राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026 की तैयारी शुरू हो गई है. उक्त आशय की जानकारी समग्र शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी भोला कुमार कर्ण ने दी.
उन्होंने बताया कि इस बार बाल विज्ञान कांग्रेस का मुख्य विषय ''निरंतरता के लिए विज्ञान एवं नवाचार'' निर्धारित किया गया है. इसके अलावा पांच उप विषयों पर भी छात्र-छात्राएं अपना प्रोजेक्ट तैयार कर सकते हैं.
उप विषयों में:
- अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पुनर्उपयोग, पुनर्प्राप्ति तथा पुनर्चक्रण
- ऊर्जा के लिए अन्वेषण, प्रयोग, संवर्धन और विकास
- वर्षा जल संचय एवं जल संसाधनों का उपयोग
- भोजन, कृषि और स्वास्थ्य
- निरंतरता के लिए भारतीय ज्ञान प्रणालियों का अनुप्रयोग शामिल हैं.
शिक्षकों के लिए आज आयोजित होगी एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला
डीपीओ ने बताया कि जिले के सभी विद्यालयों के विज्ञान शिक्षकों के लिए जिला शिक्षा कार्यालय बिहारशरीफ में एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन सोमवार को किया जा रहा है. इसमें शिक्षकों को पांच उपविषयों से संबंधित मॉडल तैयार करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा जानकारी प्रदान की जाएगी.
शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में जाकर दो-दो बच्चों की टीम बनाकर पांच-पांच मॉडल तैयार करने में उनका सहयोग प्रदान करेंगे.
जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का दो दिवसीय आयोजन 30 जुलाई और 1 अगस्त को स्थानीय नेशनल प्लस टू विद्यालय शेखाना में किया जाएगा. जिला स्तर पर चयनित मॉडल को राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में भेजा जाएगा. राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन अक्टूबर महीने में किया जाएगा.
स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक चेतना का होता है बीजारोपण
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसे राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद द्वारा उत्प्रेरित किया जाता है.
इस संबंध में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के जिला संयोजक शैलेंद्र कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के कोने-कोने में जाकर विज्ञान प्रतिभाओं की खोज करना एवं बच्चों में वैज्ञानिक चेतना का बीजारोपण करना है, ताकि उन्हें स्थानीय परिवेश में तार्किक वैज्ञानिक खोज की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके.
