Bihar Train News: मझौलिया-बेतिया रेल ट्रैक को डबल करने की योजना अब अंतिम दौर में है. इस परियोजना के तहत 3 जुलाई को होने वाले इंस्पेक्शन से ठीक पहले एक दिन का नॉन इंटरलॉकिंग यानी पटरियों को आपस में जोड़ने का काम होना है. पहले यह काम 1 जुलाई को होना था, लेकिन कुछ प्रशासनिक वजहों से इसकी तारीख बदल दी गई है. अब यह काम 2 जुलाई को किया जाएगा. इस वजह से मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज रेलखंड पर कई ट्रेनों के आने-जाने पर असर पड़ सकता है.
ट्रेनों के प्रभावित होने की लिस्ट अभी आना बाकी
पटरियों को जोड़ने के इस काम की वजह से रेल ट्रैफिक प्रभावित होना तय है. हालांकि, रेलवे प्रशासन की तरफ से अभी तक ट्रेनों के समय में बदलाव या उन्हें रद्द करने की आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है. नई तारीख फाइनल होने के बाद रेलवे ने अपनी तैयारियां और तेज कर दी हैं. स्टेशन से लेकर पूरे ट्रैक पर इंजीनियर और तकनीकी स्टाफ हर जरूरी व्यवस्था को ठीक करने में दिन-रात जुटा हुआ है.
आखिर क्या होता है नॉन इंटरलॉकिंग काम?
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, ट्रैक को डबल करने के प्रोजेक्ट में नॉन इंटरलॉकिंग सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. इसके तहत स्टेशन की सिग्नलिंग प्रणाली, नए-पुराने ट्रैक, प्वाइंट्स, इंटरलॉकिंग सिस्टम और अन्य जरूरी तकनीकी मशीनों का बारीकी से टेस्ट और तालमेल बिठाया जाता है. यह सब इसलिए किया जाता है ताकि नए ट्रैक पर जब ट्रेनें दौड़ें, तो सफर पूरी तरह सुरक्षित और सुगम रहे.
बड़े अफसरों की टीम कर रही है पल-पल की निगरानी
रेलवे के टीआई विनोद कुमार ने बताया कि पहले यह काम 1 जुलाई को होना था, लेकिन अब इसे 2 जुलाई को किया जाएगा. इस काम को समय पर पूरा करने के लिए रेलवे के अलग-अलग विभाग जैसे निर्माण, इंजीनियरिंग, सिग्नल, दूरसंचार और परिचालन की टीमें मौके पर रहकर खुद पूरी तैयारी की निगरानी कर रही हैं. किसी भी तकनीकी खराबी को तुरंत ठीक किया जा रहा है. मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ने सभी विभागों को साफ निर्देश दिया है कि 2 जुलाई को हर हाल में काम पूरा हो जाना चाहिए.
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3 जुलाई को फाइनल टेस्ट, फिर दौड़ेगी ट्रेन
अधिकारियों का कहना है कि 3 जुलाई को मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) पटरियों का फाइनल टेस्ट करेंगे. इस दोहरीकरण परियोजना के लिए यह सबसे बड़ा दिन है. अगर यह निरीक्षण सफल रहा, तो नए ट्रैक पर ट्रेनों को चलाने की हरी झंडी मिल जाएगी. इसके बाद इस रूट पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी, ट्रैफिक की समस्या खत्म होगी और यात्रियों को पहले से बेहतर रेल सुविधा मिलेगी.
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