Bihar Train News: किऊल-झाझा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी गई है. इस परियोजना के तहत 54 किलोमीटर लंबे रेलखंड का विस्तार किया जाएगा, जिस पर लगभग 962 करोड़ रुपये की लागत आएगी.
यह परियोजना भारतीय रेलवे के हाई ट्रैफिक डेंसिटी नेटवर्क (एचटीडीएन) का हिस्सा है. इसका उद्देश्य दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करना और परिचालन क्षमता को मजबूत करना है.
किऊल-झाझा रेलखंड का इतिहास
किऊल-झाझा रेलखंड दिल्ली और कोलकाता के बीच एक शॉर्टर मेन लाइन के रूप में उपयोग में रहा है. वर्तमान में इस रूट पर डबल लाइन होने के बावजूद ट्रेनों की बढ़ती संख्या के कारण भारी दबाव बना हुआ था, जिससे ट्रेनों के परिचालन में देरी हो रही थी.
तीसरी रेल लाइन बनने से ट्रेनों की गति और संख्या में वृद्धि होगी, साथ ही मालगाड़ियों के परिचालन में भी सुधार आएगा. इससे इस रूट पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और रेल सेवाएं समयबद्ध हो सकेंगी.
सांसद अरुण भारती की क्या रही भूमिका
इस परियोजना को मंजूरी दिलाने में स्थानीय सांसद अरुण भारती के प्रयासों को अहम माना जा रहा है. उन्होंने 4 फरवरी 2026 को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर झाझा-जमुई बेल्ट को हाई कैपेसिटी रेल कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की मांग रखी थी.
उन्होंने रेल मंत्रालय को 10 सूत्री प्रस्ताव सौंपा था, जिसमें बरियारपुर-मननपुर लाइन, झाझा–बटिया नई लाइन, सीतारामपुर-झाझा चौथी लाइन, नवादा-लक्ष्मीपुर परियोजना और किऊल-झाझा तीसरी लाइन जैसी योजनाएं शामिल थीं.
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कनेक्टिविटी होगी बेहतर
यह रेल कॉरिडोर पटना और कोलकाता के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा. साथ ही यह कोलकाता और हल्दिया बंदरगाह को रक्सौल और नेपाल सीमा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इससे माल ढुलाई और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स को नई गति मिलेगी.
सांसद अरुण भारती ने इस स्वीकृति को क्षेत्र की जनता की जीत बताया है. उन्होंने इसके लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि यह परियोजना पूर्व में चिराग पासवान द्वारा देखे गए रेल कनेक्टिविटी के सपने को आगे बढ़ाने का कार्य है.
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