Bihar Panchayat Delimitation: बिहार पंचायत राज विभाग की ओर से जारी सूचना के बाद जिलों में पंचायतों की सीमाओं को नए सिरे से तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है. जल्द ही गांवों और पंचायतों का नया दायरा तय किया जाएगा. इस बार यह पूरा काम राजस्व गांवों की स्थिति और साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों को ध्यान में रखकर किया जाएगा.
किस दिशा से शुरू होगी परिसीमन की प्रक्रिया?
सीमा निर्धारण का काम शुरू करते समय गांव की कुल आबादी, उसकी राजस्व स्थिति और भौगोलिक संतुलन का पूरा ध्यान रखा जाएगा. इस काम को योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए ब्लॉक के उत्तर-पश्चिम इलाके से शुरुआत की जाएगी और धीरे-धीरे काम को दक्षिण-पूर्व इलाके की ओर बढ़ाया जाएगा.
गांवों को टूटने से बचाएगा प्रशासन
प्रशासन की कोशिश रहेगी कि किसी भी गांव को फालतू में दो हिस्सों में न बांटा जाए. अगर बहुत ज्यादा प्रशासनिक जरूरत होगी, तभी किसी गांव का बंटवारा किया जाएगा. नई सीमाएं तय करते समय प्राकृतिक और स्थायी निशानों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि सीमा को लेकर कोई उलझन न रहे.
नदी, सड़क और रेलवे लाइन बनेंगे सीमा का आधार
पंचायत की नई सीमा तय करने में नदी, नहर, रेलवे लाइन, मुख्य सड़क और सार्वजनिक पहचान वाली जगहों को आधार बनाया जाएगा. इससे फायदा यह होगा कि भविष्य में दो पंचायतों के बीच सीमा को लेकर होने वाले विवाद काफी कम हो जाएंगे. पहले कई गांव दो हिस्सों में बंट जाते थे, जिससे लोगों को सरकारी कामों में परेशानी होती थी, अब इस समस्या का समाधान हो जाएगा.
सबसे ज्यादा आबादी वाले गांव के नाम पर बनेगी पंचायत
नए नियमों के मुताबिक, पंचायत का नाम सामान्य तौर पर उसी गांव के नाम पर रखा जाएगा, जिसकी आबादी उस पंचायत क्षेत्र में सबसे अधिक होगी. इसके अलावा, पंचायत का मुख्यालय भी सामान्य परिस्थितियों में उसी सबसे ज्यादा आबादी वाले गांव में ही बनाया जाएगा.
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रिजर्व्ड वर्गों की आबादी पर क्या है नियम?
अगर किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़ा वर्ग (OBC) की मिलाकर कुल आबादी 50 प्रतिशत से अधिक होती है, तो नियम बदल जाएगा. ऐसी स्थिति में पंचायत मुख्यालय उसी गांव में स्थापित किया जाएगा, जहां इन वर्गों की आबादी सबसे ज्यादा होगी. प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से पंचायतों का कामकाज आसान होगा और विकास योजनाओं का लाभ तेजी से मिलेगा.
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