Bihar News: कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार हुए श्रीनिवास लुइस ने अपने लैपटॉप से 1500 से अधिक ई-मेल भेजकर सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी थी. पटना सिविल कोर्ट को भी पिछले कुछ महीनों में सात-आठ बार इसी तरह की धमकियां मिल चुकी हैं, जिसकी कड़ियां अब लुइस से जुड़ती दिख रही हैं.
पटना पुलिस की एक विशेष टीम अब दिल्ली के लिए रवाना हो चुकी है ताकि यह साफ हो सके कि बिहार की अदालतों और विधानसभा को डराने वाला शख्स यही लुइस है या कोई और.
सलाखों के पीछे पहुंचा लुइस
लुइस खुद को कानून की नजरों से बचाने के लिए अक्सर वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का सहारा लेता था ताकि उसका लोकेशन ट्रैक न हो सके. लेकिन कहते हैं कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही देता है.
दिल्ली हाईकोर्ट को धमकी भरा ई-मेल भेजते समय उसने बिना वीपीएन के ही मैसेज सेंड कर दिया. बस इसी एक चूक ने पुलिस को उसका असली आई पी एड्रेस दे दिया और मैसूर से उसकी गिरफ्तारी मुमकिन हो पाई.
पटना पुलिस की दिल्ली में स्पेशल चेकिंग
पटना के एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा के निर्देश पर पुलिस टीम दिल्ली के साइबर थाने के साथ मिलकर लुइस के लैपटॉप और मोबाइल के ‘सेंट बॉक्स’ की पड़ताल कर रही है. पुलिस यह मैच करने की कोशिश कर रही है कि पटना हाईकोर्ट, सिविल कोर्ट और बिहार विधानसभा को उड़ाने की धमकी देने वाले ई-मेल का आई पी एड्रेस और लुइस का डिवाइस एक ही है या नहीं.
इससे पहले पटना पुलिस की टीमें लोकेशन के आधार पर चेन्नई और जैसलमेर तक खाक छान चुकी हैं, लेकिन अब लुइस के पकड़े जाने से इस गुत्थी के सुलझने की उम्मीद बढ़ गई है.
साजिश के पीछे का मकसद
अभी तक की जांच में यह साफ नहीं हो पाया है कि लुइस आखिर ये धमकियां क्यों दे रहा था. क्या यह केवल सनक थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, इसकी जांच जारी है.
1500 ई-मेल का डेटा मिलना इस बात का सबूत है कि उसने योजनाबद्ध तरीके से पूरे देश के न्यायिक सिस्टम को परेशान करने की कोशिश की थी. दिल्ली पुलिस और पटना पुलिस मिलकर अब उन सभी संस्थानों की लिस्ट तैयार कर रही है जिन्हें लुइस ने अपना निशाना बनाया था.
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