Bihar New Expressways: बिहार को नई रफ्तार देने वाले शानदार एक्सप्रेस-वे बनाने की घोषणा हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की जरूरी प्रक्रिया अभी तक सही तरीके से शुरू भी नहीं हो सकी है. कुछ परियोजनाओं में तो अभी शुरुआती काम शुरू होने की कगार पर है, जबकि कई एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट्स के लिए अभी तक डीपीआर को भी अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई है.
नेपाल को जोड़ने वाले रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण का इंतजार
रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा. इस बेहतरीन एक्सप्रेस-वे के बनने से बिहार के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल को भी पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध हल्दिया पोर्ट तक सीधी और आसान पहुंच मिल सकेगी. इस बड़े प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए बिहार में तीन हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की आवश्यकता है, लेकिन अभी तक इस जमीन को हासिल करने की आधिकारिक और विधिवत प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है.
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे का काम थोड़ा आगे
बिहार से गुजरने वाले गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए राज्य में कुल 4216 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. बाकी परियोजनाओं की तुलना में इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन जुटाने का काम थोड़ा बेहतर स्थिति में है. अब तक मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार 2207.71 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है, लेकिन योजना को पूरी गति से शुरू करने के लिए अभी भी कई मामलों में अंतिम सरकारी मंजूरी मिलना बाकी है.
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे का मामला अभी कागजों में
राजधानी पटना को पूर्णिया से जोड़ने वाले पटना-पूर्णिया एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेस-वे को लेकर अभी कागजी काम ही चल रहा है. यह पूरा प्रोजेक्ट अभी सिर्फ डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने और उसे मंजूरी दिलाने के चरण में फंसा हुआ है. जब इस डीपीआर को सरकार की तरफ से अंतिम मंजूरी मिल जाएगी. उसके बाद ही आधिकारिक तौर पर यह तय हो पाएगा कि इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए सरकार को कितने एकड़ जमीन अधिग्रहित करने की जरूरत पड़ेगी.
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आमस-दरभंगा सड़क का काम भी अटका
आमस-दरभंगा सड़क को भी एक्सप्रेस-वे के तर्ज पर ही शानदार चार लेन का बनाया जा रहा है और इसका निर्माण काम कई अलग-अलग पैकेजों में चल रहा है. इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि जमीन अधिग्रहण के लिए सरकार के पास पर्याप्त फंड मौजूद है और कई जगहों पर मुआवजे की राशि बांट भी दी गई है. इसके बावजूद काम में देरी हो रही है क्योंकि कुछ विशेष हिस्सों में कहीं 575 मीटर तो कहीं 690 मीटर जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है. इससे सड़क जोड़ने का काम बाधित है.
नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया की देखरेख में बनने वाले इन बड़े एक्सप्रेस-वे के अलावा बिहार सरकार अपने स्तर पर भी दो से तीन नए कॉरिडोर को एक्सप्रेस-वे के रूप में विकसित करने का प्लान बना रही है. मगर राज्य सरकार की इन परियोजनाओं की स्थिति भी अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है. सरकार अभी तक यह भी तय नहीं कर सकी है कि इन नए कॉरिडोर के निर्माण के लिए किस रूट पर कितने एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना होगा.
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