बिहार में लाखों LPG उपभोक्ताओं के लिए अलर्ट, इतने लाख से अधिक आय वालों की गैस सब्सिडी हो सकती है बंद

LPG Subsidy: बिहार में 10 लाख रुपये से अधिक सालाना आय वाले लाखों LPG उपभोक्ताओं की गैस सब्सिडी बंद हो सकती है. तेल कंपनियों ने ऐसे उपभोक्ताओं को अलर्ट मैसेज भेजकर जवाब देने के लिए 7 दिन का समय दिया है.

LPG Subsidy: बिहार के लाखों एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है. तेल कंपनियों ने ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान शुरू कर दी है जिनकी या उनके परिवार की सालाना आय 10 लाख रुपये से अधिक है. ऐसे लोगों को गैस सब्सिडी के दायरे से बाहर किया जा सकता है. इसके लिए उपभोक्ताओं को अलर्ट मैसेज भेजे जा रहे हैं.

20 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं को भेजा गया मैसेज

सूत्रों के मुताबिक पटना समेत पूरे बिहार में 20 लाख से अधिक एलपीजी उपभोक्ताओं को मैसेज भेजा गया है. संदेश में कहा गया है कि यदि किसी उपभोक्ता को इस कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह निर्धारित समय के भीतर अपनी बात रख सकता है. जवाब नहीं मिलने पर सब्सिडी स्वतः बंद की जा सकती है.

किन लोगों पर पड़ेगा असर?

नई व्यवस्था का सबसे अधिक असर सरकारी कर्मचारी, अधिकारी, बड़े कारोबारी और उच्च आय वर्ग के परिवारों पर पड़ सकता है. सरकार का कहना है कि सब्सिडी का लाभ केवल पात्र और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए. इसी उद्देश्य से यह प्रक्रिया शुरू की गई है.

बिहार में कितने हैं LPG उपभोक्ता?

राज्य में कुल 234.65 लाख एलपीजी उपभोक्ता हैं. इनमें इंडियन ऑयल (IOC) के 110.57 लाख, भारत पेट्रोलियम (BPCL) के 57.05 लाख और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के 67.01 लाख उपभोक्ता शामिल हैं. वहीं, अकेले पटना जिले में 13 लाख से अधिक एलपीजी कनेक्शनधारक हैं.

मृत उपभोक्ताओं के कनेक्शन की भी होगी जांच

तेल कंपनियों ने मृत उपभोक्ताओं के नाम पर चल रहे गैस कनेक्शनों की जांच भी शुरू कर दी है. आधार डाटाबेस के जरिए ऐसे कनेक्शनों की पहचान की जा रही है, जिनके धारकों की मृत्यु हो चुकी है. कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता की मौत होने पर परिवार के किसी वैध सदस्य को 30 दिनों के भीतर कनेक्शन अपने नाम ट्रांसफर कराना होगा. ऐसा नहीं करने पर कनेक्शन बंद किया जा सकता है.

आपत्ति है तो यहां करें संपर्क

यदि किसी उपभोक्ता को भेजे गए संदेश पर आपत्ति है या वह अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहता है, तो वह टोल फ्री नंबर 1800-2333-555 पर संपर्क कर सकता है. अधिकारियों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के निर्देश पर चलाई जा रही है और संबंधित संदेश सीधे तेल कंपनियों के मुख्यालय स्तर से भेजे जा रहे हैं.

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Published by: Abhinandan Pandey

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